रावण ने की थी ये गलती स्थापित हुए बैजनाथ शिवलिंग (अनोखी घटना)| Baijnath (12 Jyotirlinga)Lord Shiva
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रावण ने की थी ये गलती स्थापित हुए बैजनाथ शिवलिंग (अनोखी घटना)| Baijnath (12 Jyotirlinga)Lord Shiva
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रावण की इस (गलती) से स्थापित हुए बैजनाथ शिवलिंग (अनोखी घटना)_ Baijnath
Music Credit:
The Descent
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हिन्दू धर्म के अनुसार एक धार्मिक मान्यता है कि परली ग्राम के निकट स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग (Vaidyanath Jyotirling Temple) वास्तविक ज्योतिर्लिंग है. यह स्थान "परलीग्राम" निज़ाम हैदराबाद क्षेत्र के अंतर्गत आता है. लोगों के मुताबिक यहां का यह मन्दिर बहुत पुराना है और जिसका जीर्णोद्धार रानी अहिल्याबाई ने कराया था. लेकिन शिव पुराण के अनुसार माने तो झारखण्ड के जसीडीह के समीप देवघर का श्री वैद्यनाथ शिवलिंग ही वास्तविक वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग माना जाता है.
महापंडित रावण से जुड़ी है वैद्यनाथ शिवलिंग की कथा
पुराणों के अनुसार वैद्यनाथ शिवलिंग की कथा (Story of Baba Dham or Baidyanath Jyotirling Temple) महा प्रतापी रावण से ताल्लुक रखती है. कहते हैं एक बार राक्षस राज रावण ने हिमालय पर भगवान शिव की घोर तपस्या की. तपस्या में रावण ने एक एक करके नौ सिर काटकर शिवलिंग पर चढ़ा दिया. दसवें सिर के समय भोलेनाथ प्रसन्न हो उठे और रावण को वर मांगने को कहा. रावण ने भगवान शिव को लंका ले जाने का वर मांगा। देवों के देव महादेव ने राक्षस राज को मनोवांछित वर देते हुए कहा कि मुझे शिवलिंग के रूप में ले जाओ। लेकिन साथ ही यह भी बताया कि यदि तुम इस लिंग को ले जाते समय रास्ते में धरती पर रखोगे तो यह वहीं स्थापित हो जाएगा.
शिवलिंग को ले जाते समय रावण जैसे चिताभूमि में प्रवेश किया उसे लघुशंका करने कि इच्छा हुई. उसने उस लिंग को एक अहीर को पकड़ा किया और लघुशंका करने चला गया. इधर शिवलिंग भारी होने लगा जिसके कारण उस अहीर ने उसे भूमि पर रख दिया. वह लिंग वही अचल हो गया. तब से यह वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाने लगा. यह मनुष्य को उसकी इच्छा के अनुकूल फल देनेवाला माना जाता है. कहते हैं श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कि लगातार आरती-दर्शन करने से लोगों को रोगों से मुक्ति मिलती है.
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