श्रीमद्भागवत महापुराण | चतुर्थ स्कंध: अध्याय 8 और 9 | Shrimad Bhagwat Skandh 4 Adhyay 8, 9
आध्यात्मिक यात्रा
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श्रीमद्भागवत महापुराण | चतुर्थ स्कंध: अध्याय 8 और 9 | Shrimad Bhagwat Skandh 4 Adhyay 8, 9
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श्रीमद्भागवत महापुराण के चतुर्थ स्कंध (Canto 4) की इस पावन श्रृंखला के आज के भाग में हम प्रवेश कर रहे हैं अध्याय 8 और अध्याय 9 में। यह भाग भक्ति, दृढ़ संकल्प और ईश्वर प्राप्ति का परम उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
अध्याय 8: राजा उत्तानपाद की छोटी रानी सुरुचि द्वारा ५ वर्षीय ध्रुव का कड़वे वचनों से अपमान; माता सुनीति का धैर्यवान उपदेश और बालक ध्रुव का अकेला मधुवन की ओर प्रस्थान।
मार्ग में देवर्षि नारद का मिलना, ध्रुव की दृढ़ता देखकर उन्हें 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' १२ अक्षरी मंत्र का उपदेश और ध्यान-विधि बताना।
अध्याय 9: मधुवन में ध्रुव जी की ६ महीने की अभूतपूर्व तपस्या जिससे तीनों लोक कांप उठे; भगवान विष्णु का गरुड़ पर सवार होकर साक्षात प्राकट्य।
भगवान द्वारा बालक ध्रुव के गाल पर अपने 'पांचजन्य शंख' का स्पर्श कराना, ध्रुव जी द्वारा वेद-वाणी में स्तुति, ३६,००० वर्षों का राज्य और अचल 'ध्रुव पद' (Dhruva Lok) का परम वरदान।
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