भारत के वीर सपूत
Vinod Upadhyaya
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भारत के वीर सपूत
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Vinod Upadhyaya
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श्री विनोद उपाध्याय द्वारा लिखित यह कविता - उन धन्य माता-पिता को नमन करती है जो अपने बेटे को देश की सीमा की रक्षा के लिए भेजते हैं और उसके बलिदान पर गर्व करते हैं।
वह वीर सपूत सारे मोह-माया को छोड़कर रणभूमि में डटा है, अपनी माँ के दूध का कर्ज और अपना फर्ज निभाता है और दुश्मनों को धूल चटाता है।
चाहे रेगिस्तान की तेज गर्मी हो या सियाचिन की कड़कड़ाती ठंड, हमारे वीर जवान हर परिस्थिति में डटे रहकर जन-गण-मन गाते हैं और अपने गर्म खून से दुश्मन को पीठ दिखाकर भागने पर मजबूर कर देते हैं।
कारगिल युद्ध हो या कश्मीर में आतंकवाद, हमारे जवानों ने हमेशा दुश्मन के विश्वासघात का जवाब जीत से दिया है। जल, थल और नभ में बस एक ही गान गूंज रहा है - प्यारा भारत देश हमारा।
अंत में हर भारतवासी हर सैनिक की उस अखंड ज्योति और शहादत के सामने नतमस्तक है।
Thanks to Suno AI for creating music for the lyrics.