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ब्रह्मकपाल में पिंडदान के बाद और कहीं पिंडदान होता है क्या??

जय सनातन धर्म

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ब्रह्मकपाल में पिंडदान के बाद और कहीं पिंडदान होता है क्या??

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ब्रह्मकपाल में पिंडदान के बाद और कहीं पिंडदान होता है क्या?? Pind Daan in Gaya during Pitra Paksha is one of the sacred rituals followed by people. On Pitra Paksha, Gaya is an important place to visit to offer prayers for your ancestors as they receive Moksha. Gaya is popularly known as Pitri Tirtha. As per Hindu Mythology, Lord Ram did Raja Dashrath's Shradha Karma in Gaya. पितृपक्ष में हमारे घर के दिवगंत सदस्यों की आत्मा धरती पर आती है और पूरे सोलह दिनों तक यह आत्माएं धरती पर ही रहती हैं । मान्यतानुसार गया में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष मिलता है और गया को पितृ तीर्थ भी कहते हैं । पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान करने का हिंदू धर्म में विधान है । भगवान राम ने भी राजा दशरथ का पिंडदान इसी स्थान पर किया था साथ ही इस स्थान को श्राद्ध कर्म के लिए उत्तम मानने के पीछे ये है रहस्य । -------------------- भारतीय हिंदू पंचांग के अनुसार, अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि से पितृपक्ष (श्राद्ध) आरंभ होंगे और कुल 16 दिनों तक मनाए जाते हैं! इस साल पितृ पक्ष 20 सितंबर 2021 से शुरू होकर 6 अक्टूबर 2021 तक रहेंगे! मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध-Shradh according to the date of death: किसी व्यक्ति की मृत्यु तिथि के अनुसार ही पितृ पक्ष में श्राद्ध किया जाता है! यदि किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर उस मृत व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है, क्योंकि अमावस्या तिथि पर सर्वपितृ श्राद्ध योग माना जाता है! rashi,kundali,horoscope,future,bhavishyaphal,rashiphal,astrology,shani ki dhaiyya,panditji,kundali milan,durga mata,mahavidya,puja vidhi,puja kaise karein,navratri,chandi paath,durga saptshati,kalash sthapana,ghat sthapan,mantra,saadhna,ganga dushahra,guru,guru poornima,shivling,shivjikipuja,shiv puja,shiv ratri,shravan,saavan,shradh,brahnam bhojan,shradh kaise karein,shradh ki vidhi,shradh pujan,pitra puja,pitra shradh,pind daan,gaya ji mein pind daan कृपया ध्यान दें: वर्ष 2021 में आने वाले 26 सितंबर को श्राद्ध की तिथि नहीं है! पितृ पक्ष (श्राद्ध) का महत्व- Significance of Pitru Paksha (Shraadh): मान्यता है कि पितृपक्ष (श्राद्ध) के दिन हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और श्राद्ध से खुश होकर अपना आशीर्वाद देते हैं! हिंदू धर्म के अनुसार पितृपक्ष (श्राद्ध) करने से हमारे पितर खुश रहते हैं! आइए जानते हैं पितृपक्ष (श्राद्ध) का क्या महत्व है: •पितृपक्ष (श्राद्ध) में विधि विधान से पितर संबंधित कार्य करने और पितरों को खुश करने वाले व्यक्ति का जीवन खुशियों से भर जाता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं! •पितृपक्ष (श्राद्ध) में श्राद्ध तर्पण करने से पितर (हमारे पूर्वज) प्रसन्न होते हैं और अपना आर्शीवाद देते हैं! •पितर दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण करना शुभ माना जाता है! पितृ दोष के कारण- Paternal defect: पितृ दोष लगने के अनेक कारण होते हैं! विद्वान पंडितों के अनुसार निम्नलिखित कारणों से पितृ दोष लगता है: •परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने पर •अपने माता-पिता के अपमान करने पर. •मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म न करने पर. •किसी व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात, श्राद्ध और उनके निमित्त वार्षिक श्राद्ध आदि न करने पर. श्राद्ध पूजा की सामग्री- Shradh Puja material: श्राद्ध की पूजा विधि के लिए निम्नलिखित सामग्री की जरूरत पड़ती है: •रोली •सिंदूर •छोटी सुपारी •रक्षा सूत्र •चावल •जनेऊ •कपूर •हल्दी •देसी घी •जौ •हवन सामग्री •गुड़ •दियासलाई •शहद •काला तिल •तुलसी पत्ता •पान का पत्ता •मिट्टी का दीया •रुई बत्ती •अगरबत्ती •दही •जौ का आटा •गंगाजल •खजूर •केला •सफेद फूल •उड़द •गाय का दूध •खीर •स्वांक के चावल •मूंग •गन्ना श्राद्ध पूर्ण करने की विधि-Method of performing Shradh: पितृपक्ष (श्राद्ध) कर्म को किसी सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण से करवाना चाहिए! पितृपक्ष (श्राद्ध) कर्म में पूरी श्रद्धा से पिंड दान, तर्पण कर ब्राह्मणों को दान दिया जाता है इसके अलावा आप किसी गरीब, जरूरतमंद की सहायता कर सकें तो बहुत पुण्य मिलता है! हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि गंगा नदी के किनारे पर पितृपक्ष (श्राद्ध) कर्म करवाना चाहिए, यदि यह संभव न हो तो आप घर पर भी पितृपक्ष (श्राद्ध) कर्म कर सकते है! पितृपक्ष (श्राद्ध) वाले दिन ब्राह्मणों को भोज करवाना चाहिए और साथ ही भोजन उपरांत उन्हे दान-दक्षिणा देकर भी संतुष्ट करें! पितृपक्ष (श्राद्ध) पूजा दोपहर के समय शुरू करनी चाहिए और पितृपक्ष (श्राद्ध) पूजा को अच्छी तरह से करवाने के लिए सुयोग्य विद्वान ब्राह्मण की सहायता से मंत्रोच्चारण करवाना चाहिए और पितृपक्ष (श्राद्ध) पूजा के पश्चात जल से तर्पण करें! इसके बाद श्राद्ध के लिए तैयार जिस भी भोजन से भोग लगाया जा रहा हो तो उसमें से गाय, कुत्ते और कौवे का हिस्सा अलग कर देना चाहिए! जब आप गाय, कुत्ते, कौवे आदि को भोजन करवाएं तो उस समय अपने पितरों का स्मरण करना चाहिए और मन में पितरों को श्राद्ध ग्रहण करने का हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहिए!