The Golden Era of Radio Ceylon: Relive 60s & 70s Hindi Classics | Episode 8
Dutta's Harmonica
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The Golden Era of Radio Ceylon: Relive 60s & 70s Hindi Classics | Episode 8
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The Golden Era of Radio Ceylon: Relive 60s & 70s Hindi Classics | Episode 8
रेडियो सीलोन के सुनहरे दौर की यादें | सदाबहार पुराने हिंदी गीत
पुराने ज़माने के रेडियो प्रसारण और क्लासिक धुनों की जादुई दुनिया में आपका स्वागत है। इस वीडियो में सुनिए 50s, 60s और 70s के अविस्मरणीय और दिल को छू लेने वाले गीतों का एक ख़ास संकलन—जिसमें लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी, संध्या मुखर्जी, शैलेंद्र सिंह, हेमंत कुमार और के. एल. सहगल जैसे महान गायकों की अमर आवाज़ें शामिल हैं।
शांत माहौल में बैठकर इन सुरीले नगमों का आनंद लें और पुराने दौर की खूबसूरत यादों को ताज़ा करें।
आज की प्रस्तुतकर्ता: सामंता
विशेष प्रसंग: शैलेन्द्र सिंह के जन्मदिन पर सजे यादगार नग्मे
एपिसोड: Episode - 8
प्रसारण तिथि: 04 अक्टूबर 2026 समय : 06 AM से 08 AM
00:00 - सुबह की सभा एवं धम्मपद
03:00 - पतित उधारिणी गंगे माँ - संध्या मुखर्जी
07:20 - तू मेरी गली आना रे कान्हा - संध्या मुखर्जी
10:35 - आपकी पसंद (शैलेन्द्र सिंह स्पेशल)
13:18 - देवा हो देवा (दो जासूस) - शैलेन्द्र सिंह व लता मंगेशकर
19:50 - होगा तुमसे प्यारा कौन (ज़माने को दिखाना है) - शैलेन्द्र सिंह
26:10 - हमने तुमको देखा (खेल खेल में) - शैलेन्द्र सिंह
32:20 - प्यार में कभी-कभी (चलते चलते) - शैलेन्द्र सिंह व लता मंगेशकर
39:20 - तुमको मेरे दिल ने पुकारा (रफू चक्कर) - शैलेन्द्र सिंह व कंचन
45:40 - गुंचे लगे हैं कहने (तराना) - शैलेन्द्र सिंह
52:15 - मैं शायर तो नहीं (बॉबी) - शैलेन्द्र सिंह
57:45 - किसी पे दिल अगर आ जाए (रफू चक्कर) - शैलेन्द्र सिंह
1:02:00 - हम तुम एक कमरे में बंद हों (बॉबी) - शैलेन्द्र सिंह व लता मंगेशकर
1:09:10 - साज़ और आवाज़ (इंस्ट्रुमेंटल स्पेशल)
1:13:00 - कंकरिया मारे करके इशारे (क्लैरिनेट - मास्टर इब्राहिम)
1:16:00 - बदला ज़माना (माउथ ऑर्गन व पियानो - बी. दारूवाला व केersi मिस्त्री)
1:23:00 - एक दिल के टुकड़े हज़ार हुए (सैक्सोफोन - एस. राम सिंह)
1:29:40 - पुरानी फिल्मों का संगीत (संध्या मुखर्जी स्पेशल)
1:30:05 - आजा रे बलम तुझे मेरी कसम (एक दो तीन) - संध्या मुखर्जी
1:33:55 - बोल पपीहे बोल रे (तराना) - संध्या मुखर्जी व लता मंगेशकर
1:37:05 - ये बात कोई समझाए रे (सज़ा) - संध्या मुखर्जी
1:40:10 - धीरे धीरे दिल में समा (हुस्न का चोर) - संध्या मुखर्जी व शंकर दासगुप्ता
1:43:45 - मैंने ली अंगड़ाई (जागते रहो) - संध्या मुखर्जी
1:47:00 - टम टम (सज़ा) - संध्या मुखर्जी व हेमंत कुमार
1:50:20 - उदासियों में नज़र खो गई (फ़रेब) - संध्या मुखर्जी
1:53:10 - क्या क्या सितम सहे हैं (इज्ज़त) - संध्या मुखर्जी
1:56:05 - ऐ फूल हंस के बाग में (परवाना) - के. एल. सहगल
1:59:30 - सभा समापन एवं आभार
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This video is created purely for nostalgic, educational, and entertainment purposes by a radio enthusiast. All audio recordings, broadcasts, and songs belong to their respective original creators, SLBC, and music labels. Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as preserving history, criticism, and commentary.