नहीं है मुमकिन किसी सास का लोगों ,मां हो जाना ।।
Jharkhand Ki Beti | Sarita
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नहीं है मुमकिन किसी सास का लोगों ,मां हो जाना ।।
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Jharkhand Ki Beti | Sarita
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“नहीं है मुमकिन किसी सास का लोग माँ हो जाना…”
हर रिश्ते की अपनी एक जगह होती है। सास और माँ के रिश्ते में फर्क को महसूस कराती यह भावुक कविता उन बहुओं की भावनाओं को आवाज़ देती है, जो अपने मायके की माँ जैसा अपनापन ससुराल में तलाशती हैं। ❤️
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