Part-2 नवरात्रि उत्सव ❤️माँ दुर्गा प्रतिमा निर्माण
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Part-2 नवरात्रि उत्सव ❤️माँ दुर्गा प्रतिमा निर्माण
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माँ दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण एक अत्यंत पवित्र और कलात्मक प्रक्रिया है, जो मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के कुमाऊँटोली जैसे क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। इस निर्माण में पूरी तरह से प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।
प्रतिमा बनाने के लिए सबसे पहले लकड़ी और बांस से एक बुनियादी ढांचा (ढांचा) तैयार किया जाता है। इसके बाद, गंगा नदी की पवित्र मिट्टी (पुण्य माटी), भूसा और जूट को मिलाकर मूर्ति को आकार दिया जाता है। प्रतिमा के सूखने के बाद उस पर प्राकृतिक रंगों से चित्रकारी की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण 'चक्षु दान' (आँखें बनाना) होता है, जो महालया के दिन किया जाता है। यह कला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कलाकारों की अद्भुत शिल्पकारी को भी दर्शाती है।❤️