Vedic Pathshala & Gurukul: Jankinath Bada Mandir || Vedic Vidyalaya || जानकीनाथ वेद विद्यालय रैवासा
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Shri Jankinath Ji Bada Mandir Rewasa || जानकीनाथ जी बड़ा मंदिर रैवासा || जानकीनाथ जी बड़ा मंदिर रैवासा || रैवासा धाम का इतिहास और चमत्कार || रैवासा फोर्ट सीकर राजस्थान || रेवासा धाम, सीकर, राजस्थान || डॉ. राघवाचार्य जी महाराज रेवासा धाम || जानकीनाथ वेद विद्यालय रैवासा धाम सीकर || Indian Nomadic Family
Details of Rewas Dham:
आस्था का प्रमुख केन्द्र सीकर जिले का रैवासा धाम आध्यात्मिक रूप से भगवान श्रीराम व सीता से जुड़ा है। यहां न केवल संवत 1517 में बना जानकीनाथ का सबसे पुराना मंदिर है, बल्कि काशी व अयोध्या तक प्रख्यात सीताराम की मधुरोपासना भी इसी पीठ की देन है। मां सीता की सहेली के रूप में ग्रंथों की रचना करने वाले रैवासा पीठ के संस्थापक महाराज अग्रदेवाचार्य को यहां सीताजी के साक्षात दर्शन का भी जिक्र है। वहीं, महाकाव्य रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदासजी जी भी इस पीठ में पहुंचकर पदों की
जानकीनाथ मंदिर में भगवान श्रीराम, सीता, लक्ष्मण व हनुमानजी की आदमकद मूर्तियां हैं। जो दिव्य, भव्य और आकर्षक लगती है। खास बात यहां दिन रात होने वाली रामधुनी भी है। जो पिछले करीब 36 सालों से लगातार दिन-रात जारी है। इसके लिए पीठ के साधु-संत व शिष्य आठ-आठ घंटे रामधुनी के लिए सेवा देते है।
भक्तमाल ग्रंथ की रचना यहीं पर हुई थी। अग्रदेवाचार्य जी महाराज मानसी पुरुष थे। ठाकुर जी की पूजा मानसी रूप में करते थे। उनके एक शिष्य थे नाभा दास महाराज, जो हमेशा गुरुदेव की सेवा में लगे रहते थे। मानसी सेवा का मतलब हकीकत में वह काम करना होता है। jeenmata मंदिर से यहां की दूरी ११ km है। खाटूश्यामजी से ४५ km , और सालासर बालाजी मंदिर से ७३ km, जयपुर से १०३ km है।
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