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भीतर तेरा यार बसा है, काहे रोए-रोए | कबीराना निर्गुण भजन (Bhitar Tera Yaar Basa Hai)

@Amritdhara bhajans

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भीतर तेरा यार बसा है, काहे रोए-रोए | कबीराना निर्गुण भजन (Bhitar Tera Yaar Basa Hai)

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@Amritdhara bhajans
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खोजत-खोजत जुग भया, थक गए तेरे पाँव, न तीरथ में यार है, न मन्दिर की छाँव।" एक परम शांत और रूहानी निर्गुण सूफी भजन जो संत कबीर की इस गहरी सच्चाई को बयां करता है कि जिस ईश्वर, अल्लाह या सच्चे मित्र (यार) को हम दुनिया भर के मन्दिरों, मस्जिदों और तीरथों में ढूंढ रहे हैं, वह कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे अपने ही भीतर बैठा है। मनुष्य अज्ञानता के कारण जीवन भर बाहर रोता-भटकता रहता है, जबकि शांति का स्रोत उसके स्वयं के हृदय में है। यह संगीत एकतारा, गूंजती हुई बांसुरी और गहरे तानपूरे के साथ आपको एक गहरी अंतर्यात्रा पर ले जाएगा। यदि इस कबीराना कलाम ने आपके दिल को छुआ हो, तो इसे लाइक करें और अपने प्रियजनों के साथ जरूर साझा करें। 🎵 गीत की शैली (Music Style): Fakiri Folk / Meditative Nirgun Sufi Bhajan ✍️ बोल एवं संगीत (Lyrics Concept): Traditional Kabir Philosophy Crossover ✨ हमारे साथ जुड़ें (Connect With Us): इस तरह के और भी रूहानी, सूफी और निर्गुण भजनों के लिए चैनल को Subscribe करें। आपको इस भजन की कौन सी पंक्ति सबसे गहरी लगी? नीचे Comment करके हमें जरूर बताएं। #KabirBhajan #NirgunBhajan #SufiBhajan #BhitarTeraYaar #FakiriMusic #SantKabir #SpiritualMusic #HindiDevotional #DivineVibes