Self Liberation by Ramana Maharshi | अहंकार का नाश और आत्मा में स्थिति | Spiritual spirit
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Self Liberation by Ramana Maharshi | अहंकार का नाश और आत्मा में स्थिति | Complete Audiobook in Hindi
Self Liberation Audiobook रमण महर्षि की शिक्षाओं का सबसे गहरा और व्यावहारिक विषय है। यह ऑडियोबुक उन साधकों के लिए अमृत के समान है, जो मुक्ति के सच्चे अर्थ को समझना चाहते हैं और उसे अपने जीवन में उतारना चाहते हैं।
इस ऑडियोबुक में आप जानेंगे:
मुक्ति का सही अर्थ क्या है और क्या नहीं। रमण महर्षि की दृष्टि में मुक्ति कोई बाहरी उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने स्वरूप की पहचान है। यह न स्वर्ग है, न सिद्धि, न समाधि, बल्कि अहंकार के नाश से प्रकट होने वाली सहज स्थिति है।
अहंकार ही बंधन क्यों है। अहंकार एक कल्पना है, जो स्वयं को शरीर और मन मान लेती है। यही अहंकार संसार को रचता है, भय उत्पन्न करता है, और जन्म मृत्यु के चक्र में बाँधता है। इसकी जड़ हृदय में है, और आत्मविचार से इसकी खोज करने पर यह विलीन हो जाता है।
आत्मविचार की विधि क्या है। "मैं कौन हूँ" का प्रश्न ही रमण महर्षि की सबसे प्रभावी साधना है। यह कोई मंत्र जप नहीं, बल्कि मन को भीतर मोड़कर अहंकार की जड़ तक ले जाने की गहन प्रक्रिया है।
आत्मा में स्थिति और साक्षी भाव। आत्मा सत्, चित्, आनंद है। वह शरीर से भिन्न है, मन से भिन्न है। जब साधक साक्षी भाव में स्थित हो जाता है, तब वह संसार में रहते हुए भी असंग रहता है।
सहज स्थिति और समाधि में भेद। समाधि आती है और जाती है, परंतु सहज स्थिति सदा बनी रहती है। यही जीवन्मुक्ति का स्वरूप है। ज्ञानी की दृष्टि में सब आत्मा है, और उसका जीवन शांति, आनंद और अभय से परिपूर्ण है।
संसार में रहते हुए मुक्ति। मुक्ति के लिए संसार छोड़ना आवश्यक नहीं। केवल अहंकार छोड़ना आवश्यक है। जिसने मन से संसार त्याग दिया, वही सच्चा संन्यासी है। ऐसा व्यक्ति कर्म करते हुए भी अकर्ता रहता है।
यह ऑडियोबुक आठ भागों में विभाजित है। पहला भाग परिचय है। दूसरे में मुक्ति का सही अर्थ समझाया गया है। तीसरे में अहंकार को बंधन के रूप में देखा गया है। चौथे में अहंकार के नाश की विधि दी गई है। पाँचवें में आत्मा में स्थिति का वर्णन है। छठे में सहज स्थिति की महिमा बताई गई है। सातवें में मुक्ति की पूर्णता दिखाई गई है। और आठवें में संपूर्ण शिक्षा का सार दिया गया है।
Spiritual Spirit channel का यह members only audiobook केवल जानकारी नहीं, बल्कि परिवर्तन का माध्यम है। इसे बार बार सुनिए, मनन कीजिए, और आत्मविचार का अभ्यास कीजिए। जब भी मन भटके, तो पूछिए, मैं कौन हूँ। यही प्रश्न आपको घर लौटा ले जाएगा।
शांति सबके लिए हो। सबका कल्याण हो। रमण महर्षि की कृपा सब पर बनी रहे। ॐ शांति, शांति, शांति।