तुमने खुद ही अपना काम पहले ही तमाम कर रखा है || आचार्य प्रशांत, आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2026)
शास्त्रज्ञान
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तुमने खुद ही अपना काम पहले ही तमाम कर रखा है || आचार्य प्रशांत, आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2026)
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वीडियो जानकारी: 01.04.2026, ग्रेटर नोएडा
Title: सब व्यस्त हैं खुद को ही बर्बाद करने में || आचार्य प्रशांत, आचार्य प्रशांत, लाओत्सु पर (2026)
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विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी ताओ ते चिंग के अध्याय 15 पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि लाओत्जु प्राचीन ज्ञानियों के गुणों का वर्णन करते हुए वास्तव में अहंकार के हटने के बाद बची हुई सहज अवस्था की ओर संकेत कर रहे हैं। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि सावधानी का अर्थ अतिरिक्त तनाव या सतर्कता दिखाना नहीं, बल्कि झूठे आत्मविश्वास और अपने ही बनाए आधार को छोड़ देना है। मनुष्य का वास्तविक शत्रु बाहर नहीं, स्वयं का अहंकार है, जो अपने ही विरुद्ध तर्क गढ़कर स्वयं को नुकसान पहुँचाता है।
विनम्रता, उनके अनुसार, कोई प्रदर्शन नहीं बल्कि मालिक होने के दावे का समाप्त हो जाना है। अहंकार के जमाव से मुक्त होकर जीवन के साथ बहना, मिट्टी और अपूर्णता को स्वीकार करना तथा ऊँचाई और मान की चाह छोड़ना ही अध्यात्म की दिशा है।
“तुम ही अपने शत्रु हो।”
“तुम्हारा दुश्मन तुमसे बाहर कहीं नहीं है।”
“अहंकार अपना नाड़ा पकड़ना छोड़ दे इसको सावधानी कहते हैं।”
“झूठे आत्मविश्वास की पोल खोल देने को ही सावधानी कहते हैं।”
“तुमने खुद ही अपना काम पहले ही तमाम कर रखा है।”
“सब व्यस्त हैं खुद को ही बर्बाद करने में।”
“मेहमान हूँ, मालिक नहीं।
“अहंकार के दावों का हट जाना ही विनम्रता है।”
“हम विनम्र होते नहीं हैं, हम विनम्रता करते हैं।”
“तुम्हें ज़मीन पर उतरना है, तुम्हें गंदा हो जाना है, वही निर्मलता है।”
“जिनको इज़्ज़त प्यारी है उनको प्रेम नहीं मिलने वाला।”
“प्रेम माने अहंकार का घटना।”
“अहंकार इतना डरा होता है कि उसको सब कुछ पूर्वानुमानित, पूर्व-निर्धारित, प्रीडिक्टेबल चाहिए।”
“जिसको जीवन में मिट्टी नहीं दिख रही, उसकी तो आँखों में ही मिट्टी है।”
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संगीत: मिलिंद दाते
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