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MULTILINGUAL SHABAD DA BHAV (129), MADHO HUMAISE TU AISA, SEWA BY SEEMA KUMAR JI

MULTILINGUAL GLOBAL SEWADARS TEAM

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MULTILINGUAL SHABAD DA BHAV (129), MADHO HUMAISE TU AISA, SEWA BY SEEMA KUMAR JI

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MULTILINGUAL SHABAD DA BHAV (129), MADHO HUMAISE TU AISA, SEWA BY SEEMA KUMAR JI , INTERACTION WITH SURESH WASON JI RAGI BHAI SURINDER SINGH JI SHABAD "MADO HUM AISE TU AISA" IS COMPOSED BY GURU ARJAN DEV JI & IS PRESENT IN ANG 613 OF SHRI GURU GRANTH SAHEB JI MAHARAJ LYRICS माधो हम ऐसे तू ऐसा।। हम पापी, तुम पाप खंडन, नीको ठाकुर देसा।। हम मैले, तुम ऊजल करते, हम निरगुन, तू दाता।। हम मूरख, तुम चतुर सिआणे, तू सरब कला का गिआता।। तुम सभ साजे साजि निवाजे, जीउ पिंडु दे प्राना।। निरगुनीआरे, गुनु नही कोई, तुम दानु देहु मिहरवाना।। तुम करहु भला, हम भलो न जानह, तुम सदा सदा दइआला।। तुम सुखदाई पुरख बिधाते, तुम राखहु अपुने बाला।। तुम निधान अटल सुलितान, जीअ जंत सभि जाचै।। कहु नानक हम इहै हवाला, राखु संतन कै पाछै।।