पंजाब भी गया, कोहिनूर भी: महाराजा दलीप सिंह की कहानी | समय साक्षी | रेहान फ़ज़ल
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पंजाब भी गया, कोहिनूर भी: महाराजा दलीप सिंह की कहानी | समय साक्षी | रेहान फ़ज़ल
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पंजाब के महाराजा दलीप सिंह की कहानी एक ऐसे राजा की कहानी है, जिसने बचपन में अपना सिंहासन खोया, अपनी मां से बिछड़ने का दर्द सहा और अपनी पहचान वापस पाने के लिए जीवन भर संघर्ष किया।
महाराजा रणजीत सिंह के सबसे छोटे बेटे दलीप सिंह महज़ पांच साल की उम्र में पंजाब के महाराजा बने। लेकिन 1849 में अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्ज़ा कर लिया और उनसे उनका राज्य तथा कोहिनूर हीरा छीन लिया। कुछ ही वर्षों में उन्हें अपनी मां महारानी जिंदन कौर से अलग कर दिया गया और इंग्लैंड भेज दिया गया।
ईसाई धर्म अपनाने से लेकर वर्षों बाद सिख धर्म में लौटने और भारत वापस आने की कोशिश तक, दलीप सिंह का जीवन पहचान, सत्ता, परिवार और विरासत की एक असाधारण कहानी है।
आखिर वह अपने देश क्यों नहीं लौट पाए? और क्यों पंजाब का यह महाराजा अपने आखिरी दिनों में अपनी मातृभूमि से दूर रहा?
रेहान फ़ज़ल के साथ देखिए समय साक्षी में महाराजा दलीप सिंह की दर्दनाक दास्तान।
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