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Saannidhya Vaarta Ep 44 | Shri Ravikant Mani ji | सान्निध्य वार्ता क्रम 44 | श्री रविकांत मणि जी

सान्निध्य वार्ता

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Saannidhya Vaarta Ep 44 | Shri Ravikant Mani ji | सान्निध्य वार्ता क्रम 44 | श्री रविकांत मणि जी

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सान्निध्य वार्ता
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सान्निध्य वार्ता श्रृंखला में यह 44वीं सान्निध्य वार्ता है जिसमें श्री रविकांत मणि जी से अमरकंटक में मिलकर बाबा जी के संबंध में हमने (अशोक गोपाला, श्याम कुमार ने) वार्ता की, जिसके मुख्य अंश यहाँ प्रस्तुत हैं। श्री रविकांत मणि जी की बाबाजी से भेंट सन् 2009 में हुई। पृष्ठभूमि: मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता श्रद्धेय नागराज जी (बाबा जी) की लम्बी यात्रा में अनेक साथियों ने अलग-अलग समय पर उनका साथ निभाया, इस क्रम में बाबा जी की यात्रा के जो चरण रहे उनमें इन साथियों की भूमिका उपयोगी और सार्थक रही। ऐसे साथियों से मिल कर, उनसे बाबाजी के संस्मरण सुनने और इस वार्ता को विडियो रिकार्ड करने का सौभाग्य हमें (सुरेंद्र पाल जी, डा. श्याम कुमार और अशोक गोपाला) को मिला। इस कार्य को हमनें नवंबर 2024 से शुरू किया। इन वार्ताओं को हम क्रम से एक-एक करके प्रकाशित करेंगे। इन सान्निध्य वार्ताओं में प्रस्तुत विचार-भाव प्रत्येक प्रस्तुतकर्ता के व्यक्तिगत विचार-भाव हैं। इस बात का सम्मान करते हुए संकलन टीम ने इन्हें यथावत प्रस्तुत किया है। इस पूरे प्रयास का आशय साथियों द्वारा बाबाजी के सान्निध्य में प्राप्त प्रेरणा से उत्पन प्रभावों को उजागर करना है। सान्निध्य वार्ता में चर्चा को संदर्भित और मर्यादित रखने के लिए निम्न बिंदुओं को हमनें पहचाना और साथियों से इन्हीं बिंदुओं पर व्यक्त होने के लिए निवेदन किया: 1. आपका परिचय जिसमें आप बाबा जी से मिलने से पहले की अपनी यात्रा को भी संक्षिप्त में बताएँ। 2. आपका बाबाजी से मिलना कब और कैसे हुआ? आपने लगभग कितने समय उनके साथ बिताया?* 3. बाबाजी के साथ के घटनाएँ/संस्मरण जिनसे आप प्रभावित हुए?* 4. आपकी बाबाजी के साथ किन बिंदुओं पर मुख्य रूप से चर्चा हुई? (वस्तु, परिवार के लिए मार्गदर्शन, आशीर्वाद, ईलाज, साधना)* 5. आपकी दृष्टि में बाबाजी का मुख्य संदेश क्या है?* 6. बाबाजी के साथ जीते हुए व्यवहार में न्याय को आप कैसे देखते हैं?* 7. बाबाजी के स्वयं के जीने में समाधान एवं  समृद्धि के स्वरूप से आपने क्या प्रेरणा ली* 8. अन्य भारतीय दर्शनों के संदर्भ में आप मध्यस्थ दर्शन को कैसे देखते हैं?* 9. समय के साथ बाबाजी के द्वारा वस्तु व शैली में क्या कोई बदलाव देखा? यदि हाँ तो क्या?* 10. मध्यस्थ दर्शन के प्रचार-प्रसार में अपने योगदान को आप कैसे देखते हैं?* 11. मध्यस्थ दर्शन के वाङग्मय के संबंध में (लेखन, संपादन, मुद्रण एवं वितरण आदि) में अपने योगदान को आप कैसे देखते हैं?* 12.  अन्य कोई बात जो आप साझा करना चाहेंगे?*