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हरिराम गुर्जर ढोला लोकगीत (दिल्ली युद्ध 2) महाराजा सूरजमल का इतिहास Maharaj Surajmal History

Rathore Cassettes Official

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हरिराम गुर्जर ढोला लोकगीत (दिल्ली युद्ध 2) महाराजा सूरजमल का इतिहास Maharaj Surajmal History

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Subscribe :-    / @rathorecassettesofficial   ➤Album :- Bharatpur Ka Itihash (Dhola) (Surajmal Ka Delhi Yudh) ➤Song :- Bharatpur Ka Itihash(Dhola) (Surajmal Ka Delhi Yudh) (Part 2) ➤Singer :- Hariram Gurjar ➤Music :- Hans Raj ➤Writer :- Hariram Gurjar ➤ Label :- Vianet Media ➤ Sub Label :- Ambey ► Parent Label(Publisher) - Shubham Audio video Private Limited 85868-DVT_AMB CONTACT FOR RELEASE YOUR AUDIO/VIDEO .... { 09810082706, 9717072059 } महाराजा सूरजमल राजनीतिकुशल, दूरदर्शी, सुन्दर, सुडौल और स्वस्थ थे। उन्होने जयपुर के महाराजा जयसिंह से भी दोस्ती बना ली थी। २१ सितम्बर १७४३ को जयसिंह की मौत हो गई और उसके तुरन्त बाद उसके बेटों ईश्वरी सिंह और माधोसिंह में गद्दी के लिये झगड़ा हुआ। महाराजा सूरजमल बड़े बेटे ईश्वरी सिंह के पक्ष में थे जबकि उदयपुर के महाराणा जगत सिंह माधोसिंह के पक्ष में थे। बाद में जहाजपुर में दोनों भाईयों में युद्ध हुआ और मार्च १७४७ में ईश्वरी सिंह की जीत हुई। एक साल बाद मई १७४८ में पेशवाओं ने ईश्वरी सिंह पर दबाव डाला कि वो माधो सिंह को चार परगना सौंप दे। फिर मराठे, सिसोदिया, राठौड़ वगैरा सात राजाओं की फौजें माधोसिंह के साथ हो गई और ईश्वरीसिंह अकेला पड़ गये मई १७५३ में महाराजा सूरजमल ने फिरोजशाह कोटला पर कब्जा कर लिया। दिल्ली के नवाब गाजी-उद-दीन ने फिर मराठों को सूरजमल के खिलाफ भड़काया और फिर मराठों ने जनवरी १७५४ से मई १७५४ तक भरतपुर जिले में सूरजमल के कुम्हेर किले को घेरे रखा। मराठे किले पर कब्जा नहीं पर पाए और उस लड़ाई में मल्हार राव का बेटा खांडे राव होल्कर मारा गया। मराठों ने सूरजमल की जान लेने की ठान ली थी पर महारानी किशोरी ने सिंधियाओं की मदद से मराठाओं और सूरजमल में संधि करवा दी।