Перейти к содержимому

ગુરુજી સાથે અમાસનો છેલ્લો મેળો-1996 I Kapileswer Mander

Hariom Kalol

0:00 / 0:00

ગુરુજી સાથે અમાસનો છેલ્લો મેળો-1996 I Kapileswer Mander

3 848 просмотров · 4 г. назад
Hariom Kalol
2,79 тыс. подписчиков
3 848 просмотров · 4 г. назад
#Guruji #Guruvar #Fair ब्रह्मलीन स्वामी श्री भागवतानंदजी कलोल कपिलेश्वेर महादेव मंदिर में माँ भगवती आंबे की उपासनामें रत रहते थे , माँ की अखंड उपासना के कारण भक्तो को माँ की कृपा का प्रसाद जीवनभर बाटते रहे। वास्तव में गुरु की महिमा का पूरा वर्णन कोई नहीं कर सकता। गुरु की महिमा तो भगवान् से भी कहीं अधिक है- अपनी महत्ता के कारण गुरु को ईश्वर से भी ऊँचा पद दिया गया है। गुरु को ब्रह्मा कहा गया क्योंकि वह शिष्य को बनाता है नव जन्म देता है। ... गुरु, विष्णु भी है क्योंकि वह शिष्य की रक्षा करता है गुरु, साक्षात महेश्वर भी है क्योंकि वह शिष्य के सभी दोषों का संहार भी करता है। पौराणिक काल से ही गुरु ज्ञान के प्रसार के साथ-साथ समाज के विकास का बीड़ा उठाते रहे हैं। गुरु शब्द दो अक्षरों से मिलकर बना है- ‘गु’ का अर्थ होता है अंधकार (अज्ञान) एवं ‘रु’ का अर्थ होता है प्रकाश (ज्ञान)। गुरु हमें अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाते हैं। हमारे जीवन के प्रथम गुरु हमारे माता-पिता होते हैं। अतः माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। भावी जीवन का निर्माण गुरू द्वारा ही होता है। शास्त्रों में गुरु का महत्त्व बहुत ऊँचा है। गुरु की कृपा के बिना भगवान् की प्राप्ति असंभव है। गुरु के मन में सदैव ही यह विचार होता है कि उसका शिष्य सर्वश्रेष्ठ हो ।