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तू किसी का भी िल ना दुखाना कभी

SPIRITUAL GOAL आध्यात्मिक लक्ष्य peace शांति

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तू किसी का भी िल ना दुखाना कभी

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SPIRITUAL GOAL आध्यात्मिक लक्ष्य peace शांति
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तू किसी का भी दिल ना दुखाना कभीक्या पता गैर भी काम आ जाए कबदीन दुखियों की सेवा हमेशा तू करदूजाने किस रूप में राम मिल जाए कबसरी नारी पर तू क्यों रखता नजरतूने रावण का भी अंत देखा तो हैपाप का शकुनी बैठा तेरे मन में हैदुर्योधन की तरह चाल चलता क्यों हैतेरे जीवन की होने लगे शाम जबयह अहंकार चौरी है बहती नदीकर तू साहस जरा इसका रुख मोड़ देघोर कलयुग में अभिमन्यु कोई नहींपाप का चक्रव्यूह चल तू ही तोड़ देप्रायश्चित जब करो वो ही अच्छा समय नींद से जब भी जागो सवेरा है तबआज के युग में ईश्वर यों आते नहींआज हनुमान सा कोई सेवक नहींआज धरती पर डालो कहीं भी नजरतुमको लाखों मिलेंगे विभीषण वहीभेद घर के सभी शत्रु के पास हैंकोई ना जानता लंका ढह जाए कबआज नारी ना समझे हैं नारी धर्मढूंढने माता सीता को जाऊं कहांसत्य के मार्ग पर जो सदा ही चलेदूध का दूध पानी का पानी करेंपांडवों जैसे भाई मैं पाऊं कहांजाने भगवान अदालत लगाएगा कबआज मदिरालय का बोलबाला बड़ासूने मंदिर के कोने में रोए धर्मइस तरह गिर गए लोग धन के लिएखा रहे हैं वो गीता की झूठी कसमजा रहा वक्त लेकर यह अनमोल पलजाने पागल यह इंसान समझेगा कब