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Sariska Tiger Reserve,Rajasthan।।Jim Corbett National Park,Uttarakhand।।Shabdveni ©️Meenakshi Shukla

shabdveni

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Sariska Tiger Reserve,Rajasthan।।Jim Corbett National Park,Uttarakhand।।Shabdveni ©️Meenakshi Shukla

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पहली बार यात्रा के अनुभव के साथ कुछ बातें साझा की। आशा करती हूं आपको ज़रूर पसन्द आएगी। धन्यवाद!😊🙏 #सरिस्का #sariskanationalpark #sariskatigerreserve #sariska #jimcorbett #jim_corbett #jim_corbett_national_park #uttarakhand #राजस्थान #meenakshi_shukla #shabdveni #शब्दवेणी #writer #उत्तराखंड #rajasthan #poetry #tourism #india #bharat #भारत #tiger #बाघ #bihar #care #love_u_all #pleasesubscribe #mustwatch #viral #pleasesupport बीते साल के स्वतंत्र महीने में 'सरिस्का' जाना हुआ सच पूछो तो कुछ ख़ास मन नहीं था जैसे जैसे सरिस्का क़रीब आ रहा था मन कहीं दूर ही भटक रहा था मैं कहूँगी___ तो मानोगे नहीं___ गांव-देहात से होकर दौड़ते हुए अलगे मोड़ पर खेतों की मेड़ से फलांग मारते पोखर से आगे जाकर कहीं कच्ची सड़क से होते हुए लाल ईंटे की आड़ी तिरछी बिछी पट्टी से होकर एक काली पट्टी दिखती थी___ ये देखो बाघ तो नहीं दिख रहे लेकिन, मोर की बहुतायात है और, बंदरों ने जगह जगह अपनी टोली ही बना रखी है सुना है, आगे मन्दिर है और आज शनिवार भी पांडुपोल हनुमान जी का दिन भीम जी का भ्रम यहीं टूटा था इस अलकतरे वाली सड़क पर पैर रखने में बरसों लग जाते है उस घुप्प से निकल कर कभी दवाखाना भी जाना हो तो रोशनी चौंधयाने लगती है तुम यकीन नहीं करोगे___ जिला से लेकर मन्दिर तक हो आना... और, कभी कभी यहां वहां भटकना भी ताजेपन की भूख जैसी है अबकी गणतंत्र महीने में 'जिम कार्बेट' की सफ़ारी ली। आधुनिक आचरण सीखते हुए कब लोग मिट्टी भूल चुके होते हैं ध्यान नहीं रहता जानो कि, अब भी कितने किस्म के गाछ और जंगली जंगलों से भरे पड़े है जानवरों से लेकर कीट पतंगों की दुनिया सब मिल जाते है बकरी के मिमयाने से लेकर बिल्ली की जात भी पता होती है वहीं जो बाघ होता है पगडंडियों को पार करते हुए एक दौर जैसे गुजर गया था काली सड़कों पर उजली पट्टियों पर डब्बे जैसे रेस करते पेट्रोल डीजल की अनगिनत गाड़ियां यहां के बहुत लोगों ने गांव नहीं देखा ठीक वैसे ही जैसे गांव के लोगों ने कभी भी शहर नहीं देखा लेकिन, अंबानी की वजह से सब सम्भव हुआ डाटा की एंट्री होते ही सब जुड़ने लगे खडमड सड़कों की झूलती बस अब चकाचक भागने लगी यहां जब लोग हैरानी से पूछते कि अच्छा भैंस के साथ आदमी भी पोखर यानि गड्ढें में डुबकी लगा लेता है और बच्चे बोलते ये चापाकल क्या होता है बड़ी बड़ी आंखें कर सियार और सुअर की कहानियां सुनते सांभर, हिरण, हाथी, भालू और यहां भी बंदरों का आतंक दिखा मज़े की बात कि इस बार भी दिन शनिवार था क़रीब साढ़े तीन घंटे की कपकपाती और थका देने वाली सफ़ारी के बाद आराम करता बाघ दिखा या, फ़िर जानवरों की बस्ती में इन्सानों को देखकर सहम गया इसलिए सड़क पार करने के बजाय वहीं बैठ गया और, पता है शहर उनका था हमनें रुकना सही समझा कुछ समय पश्चात् आश्वस्त होने के बाद बाघ ने सड़क पार कर दूसरी ओर जाना उचित समझा ऐसा लगा मानो, तपस्या पूर्ण हुई सामने से आता हुआ राजसी ठाठ में बाघ चमकीले प्राकृतिक वस्त्र आँखों की पुतलियां बड़ी हो गई हर्ष हमारी सारी थकान ले गया पहाड़ों में मन्दिर की सुन्दरता मन मोह लेती है 'देवी गर्जिया' के ऊँचे सिंहासन उनके मुख मंडल की आभा देखते ही बनती है कितना अजीब है न बढ़ने के लिए आगे भागते हैं और घूम फ़िर कर वापस उधर ही लौट जाते हैं पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बेहद आवश्यक है। -©️ Meenakshi Shukla #यात्रा #अनुभव #धन्यवाद