Insan ki barikiyan।इंसान की बारीकियां।VED PRAKASH BASANT।©Rinkal। परिवार के साथ सुनने लायक200कविताएं
VED PRAKASH BASANT OFFICIAL VERIFIED
0:00 / 0:00
Insan ki barikiyan।इंसान की बारीकियां।VED PRAKASH BASANT।©Rinkal। परिवार के साथ सुनने लायक200कविताएं
48 081 просмотр · 2 года назад
VED PRAKASH BASANT OFFICIAL VERIFIED
6,26 тыс. подписчиков
48 081 просмотр · 2 года назад
#vedprakashbasant #rinkal
• insan ki barikiyan।Ved।इंसान की बारीकियां।...
• Insan ki barikiyan।इंसान की बारीकियां।VED ... #insan ki barikiyan।#इंसान की बारीकियां।#VED PRAKASH BASANT।©Rinkal। #परिवार के साथ सुनने लायक200कविताएं#rinkal
Ved Prakash Basant official verified
वेद प्रकाश बसंत आधिकारिक सत्यापन
लाइक करें (like Kare)
please like
सब्सक्राइब करे (subscribe Kare)
शेयर करे (share Kare)
लेखक -- वेद प्रकाश बसंत
Author -- Ved Prakash Basant
Writer -- Ved Prakash Basant
इस वीडियो में आप मेरी 200 कविताओं के संग्रह को सुनेंगे
इंसान की बारीकियां- 0:00
अंधेरों को उजालों की- 1:10
जरूरत आदमी को- 2:31
जरूरी यह नहीं है- 3:47
समय मुझको दलेगा- 4:59
घमंड नहीं- 6:14
जिंदगी इंसान के- 7:39
तू मुझे- 8:47
समय शब्दों का है- 9:57
क्यों जरूरत- 11:12
योग्यता- 12:17
शुरू करें- 13:27
झुक गया है- 14:52
इंसान क्यों- 16:01
डर रहा हूँ - 17:18
मैं स्वयं को- 18:25
मैं हूँ जिंदा सफर- 19:25
इंसान क्यों इंसान - 20:31
निश्चय करो कि- 21:35
क्यों मुझे- 22:40
डरता है तू- 23:57
फर्क तेरा- 25:29
करना पड़ेगा- 26:53
साधारण सा- 28:15
निर्बलता मत अपनाना- 29:28
मैं कैसे समझाऊं- 30:54
जिंदगी का गम हमें- 32:34
मन हमें इंसान जैसा- 33:35
कितना समय- 34:40
द्रण अस्तित्व- 36:07
मैं सोचता हूँ- 37:54
चेहरे बदल रहे होंगे- 39:10
जरूरत आदमी को क्या- 40:32
कर्म कर- 41:41
समय क्यों लचीला- 43:05
समय जानता है- 44:48
मेरा मुझे- 46:11
जीवन में इस- 47:38
मैं मुझको न- 48:48
निर्णय है- 50:11
मैं मेरी जिंदगी- 51:49
नहीं बदल पाया- 53:25
इंसान बनने में- 54:52
मन भरोसा तोड़कर- 56:11
नाराजगी ये क्यों हो गई- 57:25
आँधियों का जोर- 59:49
हमारी आँख का पानी- 1:01:38
भरोसा टूट जाता है- 1:02:51
मुझे इंसान रहने दो- 1:04:14
तेरा नाम ही तो- 1:05:34
समय मन की तसल्ली है- 1:07:08
भीड़ भी गंभीर है- 1:08:35
जिंदगी की हर हकीकत- 1:09:48
व्यक्ति ने- 1:11:06
समय बदला है- 1:12:15
दर्द यह दर्द नहीं बन पाया- 1:13:41
झूठ क्या है- 1:15:08
गम हमें गम- 1:16:06
व्यक्ति के भीतर का धन- 1:17:16
खुद का जीवन- 1:18:26
भगवान मत बनना- 1:20:02
डर को मन में पालकर- 1:21:20
व्यक्तिगत संभावना- 1:22:34
रास्ते इंसान को- 1:23:50
रोज चेहरे- 1:25:00
मन ये मन जैसा तड़पकर- 1:26:20
खो रही है भावना- 1:27:31
गम को गम- 1:28:41
मन ने मन का- 1:30:48
शुरुबात का अंत- 1:32:40
मन की पीड़ा- 1:33:56
वक्त क्यों है- 1:35:11
मन परछाई- 1:36:16
अर्थ से अर्थ का- 1:37:18
मुझको मन की ये- 1:38:17
नया सफर है- 1:40:09
मन याद ना भूले- 1:41:40
दर्द गहरा पाएगा- 1:42:48
छलना न हक को- 1:44:00
तू व्यक्त कर- 1:45:45
मैं नई सुबह का- 1:46:57
अधीरता अधीर बनकर- 1:48:26
क्रोध बन गया है मन- 1:49:23
टूटता क्या रहा- 1:50:38
राजनीति राज- 1:51:33
निरंतर जिंदगी की- 1:52:42
बदल जाते हैं- 1:53:55
समय ही जिंदगी के- 1:55:05
जिंदगी की लौ बनो- 1:56:16
लिखा कुछ भी नहीं- 1:57:23
हमसे भी तो- 1:58:39
समय विश्वास करता है- 1:59:50
शब्द तो बनी नहीं है- 2:01:03
कर्म करने की हकीकत- 2:02:05
शुरुबात है- 2:03:17
उम्मीद क्यों मिटती नहीं- 2:04:57
जिंदगी आईना- 2:06:06
चेहरे हमें- 2:07:07
हमें याद करना- 2:07:59
बदल के जीवन- 2:09:40
=========================
(101)आँख छलकी है मेरी
(102)हम भी जीवन के
(103)है असरदार
(104)कुछ तो है
(105)समझा रहा हूँ मैं
(106)खुद के भीतर
(107)मुझे बीमार मत करना
(108)चेहरे अक्सर
(109)इंसान हो इंसान
(110)चेहरे-चेहरे बन जाते हैं
(111)गगन रोता है
(112)चेहरे दर्पण बने
(113)मुझे गहराई तक
(114)हकीकत के समुन्दर को
(115)दर्द समझ में ना आए तो
(116)समझ रहा है
(117)व्यक्तित्वों में जिज्ञासा है
(118)हम खुद की निंदा सहते हैं
(119)जो बदल सकता नहीं
(120)इंसान जो इंसान बनना
(121)इंसान का व्यक्तित्व
(122)लोगों ने अच्छाई को
(123)ये पहरे भी तो
(124)ये शब्दों की है पैमाइश
(125)रास्ते व्यक्तित्व के
(126)इंसान की परिभाषा
(127)हकीकत
(128)जीवन को मैं कैसे समझूं
(129)मन की वीणा
(130)यही इंसान अब
(131)कमजोर मत कर
(132)गिरा है टूट कर
(133)ये गहरी बात
(134)मुझ पर
(135)जीवन को हम
(136)मन ही मन को
(137)परख नहीं
(138)निर्मोही को
(139)लोगों को
(140)मन की गहराई
(141)वक्त इंसान की
(142)जिंदगी ने
(143)इंसान क्यों
(144)तू मेरी
(145)तू मुझे अपना
(146)तूने जो
(147)हम इंसान हैं
(148)निस्वार्थ भाव का
(149)तू अभी परछाई है
(150)मन को मन ने
(151)समय हकीकत समझाता है
(152)उतार-चढ़ाव
(153)प्रण कहता है
(154)समय हकीकत देख रहा है
(155)व्यक्ति है
(156)मेरे मन के
(157)इंसान को क्यों
(158)मन की
(159)इंसान हो
(160)हमें भीतर से मत तोड़ो
(161)हमने समझा है
(162)खुला व्यक्तित्व
(163)मुझे भी
(164)ये मेरा गम
(165)जहाँ चेहरे बदलते हैं
(166)मैं समझा
(167)यहाँ इन्सान की
(168)गहराई से
(169)आँख से
(170)छोड़ना अब
(171)इन्सान जब
(172)मैं कर्म का प्रतीक
(173)मुझको मुझपर
(174)सीखने में
(175)मैंने खुद पर
(176)मैं समय का
(177)मैं नहीं सामने
(178)भूलकर
(179)हाथ में
(180)चेहरे कुछ
(181)सामने कुछ और थे
(182)मैं खुद की कदर
(183)दौड़ती भागती हैं
(184)वक्त के सामने
(185)हम नहीं
(186)हमने समझा नहीं
(187)एक दिन का सफर
(188)कुछ चेहरे
(189)चलते हैं
(190)चेहरे कुछ वक्त में ही
(191)हम हकीकत
(192)चेहरे कितने
(193)जो बाँधे
(194)पर्दे गिरते हुए
(195)मैंने खुद को ही
(196)एक सवेरा
(197)कुछ लोगों ने
(198)हमने परछाई का
(199)जिंदगी में
(200)चेहरे मन के मन से न भागे