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पाट शोभावी || Paat Shobhavi

Ashtal Musico и ещё 3

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पाट शोभावी || Paat Shobhavi

335 просмотров · 13 дней назад
Ashtal Musico и ещё 3
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तपागच्छ पट्टावली महारास सा. प्रशमिताश्री जी पाट शोभावी चुम्मालिसमी, यावज्जीव आयंबिल तप कीध, बार वर्ष तप आराधियो, पाम्या बिरुद तपागच्छ सिद्ध। 1 सोमप्रभ मणिप्रभणा पाटवी, नामे जगच्चंद्र सूरि गवाय, गुर्वाज्ञाने देवभद्र सहायथी, चैत्र गच्छ ने क्रियोद्धार कराय। 2 एह कार्य सिद्ध करवा काज, विपुल कर्यो त्याग सूरि राय, दिगंबरों त्रास करे अपार, वाद करी दिगंबरों ने हराय। 3 ते माटे मेवाडना जैत्रसिंह नरेश, आपे बिरुद हीरला जगच्चंद्र, वळी यावज्जीव आयंबिल तप कर्यो, तिण तपा बिरुद आपे भूपेंद्र । 4 बारसे पंचाशीनी सालमां, निर्ग्रंथ नाम छट्ठो तपागच्छ कहाय, अद्यपि शासन उन्नति करे नही, प्रतापी पट्टधर सूरि राय। 5