पाट शोभावी || Paat Shobhavi
Ashtal Musico и ещё 3
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पाट शोभावी || Paat Shobhavi
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तपागच्छ पट्टावली महारास
सा. प्रशमिताश्री जी
पाट शोभावी चुम्मालिसमी, यावज्जीव आयंबिल तप कीध,
बार वर्ष तप आराधियो, पाम्या बिरुद तपागच्छ सिद्ध। 1
सोमप्रभ मणिप्रभणा पाटवी, नामे जगच्चंद्र सूरि गवाय,
गुर्वाज्ञाने देवभद्र सहायथी, चैत्र गच्छ ने क्रियोद्धार कराय। 2
एह कार्य सिद्ध करवा काज, विपुल कर्यो त्याग सूरि राय,
दिगंबरों त्रास करे अपार, वाद करी दिगंबरों ने हराय। 3
ते माटे मेवाडना जैत्रसिंह नरेश, आपे बिरुद हीरला जगच्चंद्र,
वळी यावज्जीव आयंबिल तप कर्यो, तिण तपा बिरुद आपे भूपेंद्र । 4
बारसे पंचाशीनी सालमां, निर्ग्रंथ नाम छट्ठो तपागच्छ कहाय,
अद्यपि शासन उन्नति करे नही, प्रतापी पट्टधर सूरि राय। 5