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हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर दिया और भगवान राम व लक्ष्मण को सुरक्षित लंका वापस लेकर आए।

Mahishanu RanaUk13

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हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर दिया और भगवान राम व लक्ष्मण को सुरक्षित लंका वापस लेकर आए।

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Mahishanu RanaUk13
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अहिरावण वध की कथा • अहिरावण कौन था: अहिरावण (जिसे कई कथाओं में महिरावण भी कहा जाता है) पाताल लोक का राजा और लंकापति रावण का भाई था। वह तंत्र-मंत्र और मायावी युद्ध का विशेषज्ञ था। • श्रीराम और लक्ष्मण का अपहरण: जब लंका युद्ध में रावण हर मोर्चे पर हारने लगा, तब उसने मायावी अहिरावण की मदद ली। अहिरावण ने रात के समय विभीषण का रूप धारण किया, श्रीराम और लक्ष्मण की कुटिया में प्रवेश किया और उन्हें अज्ञान-निद्रा (सम्मोहन) में डालकर पाताल लोक ले गया। • बलि की योजना: पाताल लोक ले जाकर अहिरावण ने श्रीराम और लक्ष्मण को देवी के समक्ष बलि देने की योजना बनाई, ताकि वह अपनी राक्षस जाति और खुद को बचा सके। • हनुमान जी का पाताल लोक जाना: जब विभीषण को इस छल का पता चला, तो उन्होंने हनुमान जी को पाताल लोक जाने का मार्ग बताया। पाताल लोक के द्वार पर हनुमान जी का सामना उनके अपने पुत्र मकरध्वज से हुआ। • अहिरावण का वध: अहिरावण का अंत करने के लिए एक रहस्य था—पाताल लोक में पांच अलग-अलग दिशाओं में पाँच दिए (दीपक) जल रहे थे, जिन्हें एक ही समय में बुझाए बिना अहिरावण को मारना असंभव था। तब हनुमान जी ने पंचमुखी हनुमान (Hayagriva, Narasimha, Garuda, Varaha और Hanuman रूप) का विशाल रूप धारण किया और एक साथ पाँचों दिशाओं के दीपकों को बुझा दिया। इसके बाद हनुमान जी ने अहिरावण का वध कर दिया और भगवान राम व लक्ष्मण को सुरक्षित लंका वापस लेकर आए।