जन्माष्टमी: पुजारी की पीड़ा, "लोगों ने मूर्तिपूजा का मज़ाक बना दिया" || आचार्य प्रशांत (2026)
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
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जन्माष्टमी: पुजारी की पीड़ा, "लोगों ने मूर्तिपूजा का मज़ाक बना दिया" || आचार्य प्रशांत (2026)
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वीडियो जानकारी: 31.08.2026, संत सरिता सत्र, गोवा
Title: जन्माष्टमी: पुजारी की पीड़ा, "लोगों ने मूर्तिपूजा का मज़ाक बना दिया" || आचार्य प्रशांत (2026)
विवरण:
क्या मूर्तिपूजा सही है या गलत? क्या मूर्ति के सामने पूजा और प्रार्थना आत्मज्ञान की दिशा में ले जा सकती है, या हम उसे अपनी इच्छाओं की पूर्ति का साधन बना लेते हैं?
इस चर्चा में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि मूर्ति न अच्छी है, न बुरी। उसका उपयोग हमारी नीयत पर निर्भर करता है। मूर्ति का उद्देश्य स्वयं को देखने वाले दर्पण की तरह होना है, ताकि कृष्ण, राम, बुद्ध जैसे महापुरुषों के सामने खड़े होकर अपनी क्षुद्रता और अपनी उच्चतम संभावना को देखा जा सके।
जन्माष्टमी के संदर्भ में वे समझाते हैं कि श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने खड़े होकर यदि गीता और निष्काम कर्म याद नहीं आते, तो मूर्तिपूजा का उद्देश्य ही चूक गया।
मुख्य विषय:
मूर्तिपूजा सही है या गलत?
मूर्ति का सही उपयोग और दुरुपयोग
मूर्ति, अहंकार और Self-Deception
कृष्ण की मूर्ति और भगवद्गीता
जन्माष्टमी का वास्तविक अर्थ
गुरु, ग्रंथ और मूर्ति का उद्देश्य
धर्म और कामनाएँ
आत्मज्ञान और आत्म-अवलोकन
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