तूफानी लहरों में जहाजों पर ऐसे-ऐसे मैन्यूवर! | DW Documentary हिन्दी
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तूफानी लहरों में जहाजों पर ऐसे-ऐसे मैन्यूवर! | DW Documentary हिन्दी
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समुद्री पायलटों को बेहद मुश्किल हालात में बड़े अहम फ़ैसले लेने होते हैं. हरिकेन से पैदा हुई लहरों और झोंकों में कार्गो शिप से छोटी पायलट बोट पर उतरना जानलेवा हो सकता है.
समुद्री पायलटों के रोज़मर्रा के काम में ये सबसे ख़तरनाक पल होता है. तूफ़ानी झोंकों के बीच कार्गो शिप से रस्सी की सीढ़ी से उतरकर छोटी पायलट बोट पर जाना. जनवरी के मध्य में बोरकुम के पास एक पायलट समुद्र में गिर गया और हाइपोथर्मिया के कारण उसे हॉस्पिटल ले जाना पड़ा. उससे कुछ ही दिन पहले ऐसे ही एक मैनूवर में एक ब्रिटिश पायलट की मौत हो गई थी.
हार्बर पायलट गेरहार्ड यान्सेन और सी पायलट डोमिनिक थीबेन अपने मिशन की तैयारी कर रहे हैं. फोर्स 8 की हवाओं में वो पायलट बोट से मालवाहक जहाज़ ‘द सिल्वर सोल’ की ओर निकलते हैं. उन्हें जहाज़ को बंदरगाह से सुरक्षित निकालकर उत्तरी जर्मनी की एम्स नदी से होते हुए उत्तरी सागर तक ले जाना है. रास्ते में सामने से आता ट्रैफ़िक, कम विज़िबिलिटी और बेहद संकरा चैनल चुनौती बढ़ाते हैं, जहां मैन्यूवर की गुंजाइश बहुत कम है. बोरकुम द्वीप के पास एक पायलट बोट उन्हें लेने आएगी और वापस किनारे तक पहुंचाएगी. तूफ़ान में एक से दूसरे जहाज़ पर जाना जानलेवा हो सकता है.
निकालना पड़ेगा, जो ब्यूफ़ोर्ट स्केल पर फोर्स 11 तक की हवा में उड़ सकता है. यानी 100 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज़ हरिकेन-फ़ोर्स तूफ़ान में भी. पायलटों को रस्सी से खींचकर हेलिकॉप्टर में चढ़ाया जाता है. हर मैन्यूवर में पायलटों और क्रू को, चाहे पायलट बोट पर हों या हेलिकॉप्टर में, ये तय करना पड़ता है कि वो कितना जोखिम लेने को तैयार हैं.
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