Muslim Reservation: मुसलमानों को भी मिले आरक्षण! मौलाना ने कर दी मांग, Minorities | Muslim Aarakshan
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Muslim Reservation: मुसलमानों को भी मिले आरक्षण! मौलाना ने कर दी मांग, Minorities | Muslim Aarakshan
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मुसलमानों को भी आरक्षण मिले! मुस्लिम समाज के पिछड़े वर्गों के लिए आवाज उठाते हुए हाफिज गुलाम सरवर ने आरक्षण की बड़ी मांग रखी है। उनका कहना है कि मुस्लिम समाज में भी सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़े वर्ग मौजूद हैं, इसलिए जिस तरह दूसरे सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों को आरक्षण का लाभ मिलता है, उसी आधार पर पिछड़े मुसलमानों को भी आरक्षण मिलना चाहिए।
लेकिन सवाल सिर्फ आज की मांग का नहीं है—मुस्लिम आरक्षण का इतिहास क्या रहा है? मुसलमानों को अब तक कितना आरक्षण मिला है? और संविधान में मुस्लिम समाज के लिए आरक्षण की मौजूदा स्थिति क्या है?
भारत में धर्म के आधार पर सीधे आरक्षण और सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण में बड़ा अंतर है। संविधान के तहत OBC जैसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान है। इसी वजह से कई राज्यों और केंद्र की OBC सूचियों में मुस्लिम समुदायों की अलग-अलग जातियां/बिरादरियां शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर NCBC की केंद्रीय OBC सूची में बिहार की सूची में कसाब/कसाई (मुस्लिम), कलंदर आदि समुदाय दर्ज हैं।
मुस्लिम SC आरक्षण का क्या इतिहास है?
1950 के Constitution (Scheduled Castes) Order में SC का दर्जा शुरुआत में हिंदू समुदाय तक सीमित था। बाद में 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध समुदायों को इसमें शामिल किया गया। लेकिन मुस्लिम और ईसाई समुदायों के लिए SC दर्जे का विस्तार अभी तक नहीं हुआ है।
यही वजह है कि दलित मुस्लिमों को SC आरक्षण में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग ने क्या कहा?
2006 की सच्चर कमेटी ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट दी थी। इसके बाद रंगनाथ मिश्र आयोग ने 2007 में मुस्लिमों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए। आयोग ने मुस्लिमों के लिए 10% आरक्षण और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए अतिरिक्त आरक्षण की सिफारिश की थी। उसने दलित मुस्लिमों और दलित ईसाइयों को SC व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में भी सुझाव दिया था।
हालांकि इन सिफारिशों को देशभर में उसी रूप में लागू नहीं किया गया।
4.5% मुस्लिम आरक्षण की कोशिश
2012 में केंद्र की UPA सरकार ने 27% OBC कोटे के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए 4.5% उप-कोटा देने का प्रयास किया था। लेकिन यह व्यवस्था कानूनी चुनौती में फंस गई और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।
कर्नाटक में 4% मुस्लिम आरक्षण
कर्नाटक में मुस्लिमों को लंबे समय तक 2B श्रेणी के तहत 4% OBC आरक्षण मिलता रहा। 2023 में तत्कालीन सरकार ने इसे खत्म करने का फैसला किया और इस 4% को अन्य समुदायों में बांटने की कोशिश की। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और उस समय अदालत में सरकार ने कहा कि सुनवाई पूरी होने तक नई व्यवस्था के आधार पर नियुक्तियां और दाखिले नहीं किए जाएंगे।
तेलंगाना में भी आरक्षण का मुद्दा
तेलंगाना में BC-E श्रेणी के तहत मुस्लिम समुदाय के कुछ पिछड़े वर्गों के लिए 4% आरक्षण का प्रावधान रहा है। 2025 में इस आरक्षण और BC कोटे के विस्तार को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद फिर तेज हुआ। राज्य सरकार का तर्क है कि यह आरक्षण केवल धर्म के आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के आधार पर है।
2026 में फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा
अब 2026 में Pasmanda Muslims के लिए OBC के भीतर अलग कोटा देने की मांग भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है। फरवरी 2026 में अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मुस्लिमों के विभिन्न पिछड़े समुदायों के आंकड़ों और आधार के बारे में सवाल उठाए। याचिका में रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशों के आधार पर Pasmanda Muslims के लिए 10% कोटा की मांग की गई है। मामला अभी न्यायिक विचार के स्तर पर है—कोई देशव्यापी नया मुस्लिम आरक्षण लागू नहीं हुआ है।
तो अब बड़ा सवाल यह है—
क्या मुस्लिम समाज के सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को उनकी पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए?
क्या धर्म नहीं बल्कि जाति, सामाजिक पिछड़ापन, शिक्षा और आर्थिक स्थिति आरक्षण का आधार होना चाहिए?
और क्या दलित मुस्लिमों को भी SC आरक्षण के दायरे में लाया जाना चाहिए?
इसी मुद्दे पर हाफिज गुलाम सरवर ने अपनी आवाज बुलंद की है।
इस वीडियो में जानिए मुस्लिम आरक्षण का पूरा इतिहास, सच्चर कमेटी और रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिशें, कर्नाटक और तेलंगाना का मॉडल, SC आरक्षण में मुस्लिमों की मौजूदा कानूनी स्थिति और 2026 में सुप्रीम कोर्ट में चल रही बहस।
आप मुस्लिम आरक्षण के पक्ष में हैं या इसके खिलाफ? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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