मीठू | Darshim's Diary
The Second Seat
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मीठू | Darshim's Diary
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The Second Seat
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मैंने पापा से पूछा था, “मुझे साँस कब आएगी?”
पापा ने कहा, “कुछ घाव समय के साथ भरते नहीं, और गहरे हो जाते हैं।”
2 जून 2024 को दिल्ली में, अपने फ़्लैट में, मेरे भाई अमोल सक्सेना की 20 वर्ष की आयु में साँस रुक गई। वो स्वस्थ था। रात को उसने खाना खाया, सोया, नींद से उठा, उसे उल्टी हुई और वो उसकी साँस की नली में फँस गई।
मीठू। मेरा भाई।
आज भी कोई मुझसे कहे कि मेरा सब कुछ चला जाएगा, लेकिन वो लौट आएगा, तो मैं एक सेकंड में मान जाऊँगी।
भाई कभी “था” नहीं हो सकता।
रचना
दर्शिम सक्सेना और अमोल सक्सेना
पाठ
दर्शिम सक्सेना