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सभी देवी-देवता इसे रोज पढ़ते हैं - विजय कवच | VIJAY KAVACH | kavach in hindi | kavach hindi | kavach

Mantra Sarovar

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सभी देवी-देवता इसे रोज पढ़ते हैं - विजय कवच | VIJAY KAVACH | kavach in hindi | kavach hindi | kavach

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सभी देवी-देवता इसे रोज पढ़ते हैं - विजय कवच | VIJAY KAVACH | kavach in hindi | kavach hindi | kavach _______________________________________________________________ हमारा सपोर्ट करें - https://www.youtube.com/c/MantraSarov... ~ हमारे द्वारा प्रस्तुत सबसे दुर्लभ कवच संग्रह सुनने के लिए क्लिक करें -    • कवच संग्रह - Kavach Sangrah   ~ मुर्दे ( बीमारी के कारन मरणासन्न ) को भी प्राण देने वाला शिव मृत संजीवनी कवच -   • Mrit Sanjeevani kavach in hindi - मृत संजी...   ~ रोज घर में चलाइये हनुमान जी वहीँ बैठे रहेंगे -    • विराट पंचमुखी हनुमान कवच - Panchmukhi Hanu...   ~ ग्रह बाधा कितनी भी किसी ज्योतिषी ने कुछ भी बताया हो इसके पाठ से सब दूर विष्णु सहस्त्रनाम -    • Vishnu Sahasranamam In Hindi | Vishnu Saha...   ~ पति-पत्नी की लड़ाई ख़तम -    • शिव विवाह की अध्भुत कथा - गोस्वामी तुलसीदा...   is kavach ke labh - इस कवच के लाभ भगवान् शंकर बोले वत्स! इस प्रकार मैंने 'त्रैलोक्यविजय' नामक कवच, जो परम अनोखा तथा समस्त मन्त्रसमुदाय का मूर्तिमान् स्वरूप है, तुम्हें बतला दिया। मैंने इसे श्रीकृष्ण के मुख से श्रवण किया था। जो विधिपूर्वक पूजन करके इस कवच को गले में अथवा दाहिनी भुजापर धारण करता है,वह भी विष्णुतुल्य हो जाता है; इसमें संशय नहीं है। वह भक्त जहाँ रहता है, वहाँ लक्ष्मी और सरस्वती निवास करती हैं। यदि उसे कवच सिद्ध हो जाता है तो वह जीवन्मुक्त हो जाता है और उसे करोड़ों वर्षों की पूजा का फल प्राप्त हो जाता है। हजारों राजसूय यज्ञ , सैकड़ों वाजपेय, दस हजार अश्वमेध, सम्पूर्ण महादान तथा पृथ्वी की प्रदक्षिणा- ये सभी इस त्रैलोक्यविजय की सोलहवीं कला की भी समानता नहीं कर सकते। व्रत-उपवास का नियम, स्वाध्याय, अध्ययन, तपस्या और समस्त तीर्थों में स्नान- ये सभी इसकी एक कला को भी नहीं पा सकते। यदि मनुष्य इस कवच को सिद्ध कर लेता है तो निश्चय ही उसे सिद्धि, अमरता और श्रीहरि की दासता आदि सब कुछ मिल जाता है। जो इसका दस लाख जप करता है, उसे यह कवच सिद्ध हो जाता है और जो सिद्धकवच होता है, वह निश्चय ही सर्वज्ञ हो जाता है। trailokya vijay kavach in hindi / trailokya vijay kavach hindi / trailokya vijay kavach / vijay kavach in hindi / vijay kavach hindi / vijay kavach / त्रैलोक्य विजय कवच हिंदी में / त्रैलोक्य विजय कवच हिंदी / विजय कवच हिंदी में / विजय कवच हिंदी / विजय कवच शिवजीका प्रसन्न होकर परशुरामको त्रैलोक्यविजय नामक कवच प्रदान करना नारद जी ने पूछा- भगवन् ! अब मेरी यह सुनने की इच्छा है कि भगवान् शंकर ने दयावश परशुराम को कौन-सा मन्त्र तथा कौन-सा स्तोत्र और कवच दिया था ? तथा कवच धारण करने का क्या फल है? वह सब आप मुझे बतलाइये। नारद के इस प्रकार आग्रह करने पर भगवान् नारायण बोले- नारद ! उस मन्त्र के आराध्य देव गोलोकनाथ गोपीश्वर सर्वसमर्थ परिपूर्णतम स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण हैं। भगवान् शंकर ने रत्नपर्वत के निकट स्वयंप्रभा नदी के तटपर पारिजात वन के मध्य स्थित आश्रम में लोकों के देवता माधव के समक्ष परशुराम को 'त्रैलोक्यविजय' नामक परम अद्भुत कवच प्रदान किया था। कवच प्रदान करते समय भगवान् महादेव जी ने परशुराम जी से कहा - भृगुवंशी महाभाग वत्स ! तुम प्रेम के कारण मुझे पुत्र से भी अधिक प्रिय हो;अतः आओ कवच ग्रहण करो। राम। जो ब्रह्माण्ड में परम अद्भुत तथा विजयप्रद है, श्रीकृष्ण के उस 'त्रैलोक्यविजय' नामक कवच का वर्णन करता हूँ, सुनो। पूर्वकाल में श्रीकृष्ण ने गोलोक में स्थित वृन्दावन नामक वन में राधिकाश्रम में रासमण्डल के मध्य यह कवच मुझे दिया था। यह अत्यन्त गोपनीय तत्त्व, सम्पूर्ण मन्त्रसमुदाय का विग्रहस्वरूप, पुण्य से भी बढ़कर पुण्यतर परमोत्कृष्ट है और इसे स्नेहवश मैं तुम्हें बता रहा हूँ। जिसे पढ़कर एवं धारण करके मूलप्रकृति भगवती आद्याशक्ति ने शुम्भ, निशुम्भ, महिषासुर और रक्तबीज का वध किया था। जिसे धारण करके मैं लोकों का संहारक और सम्पूर्ण तत्त्वों का जानकार हुआ हूँ तथा पूर्वकाल में जो दुरन्त और अवध्य थे, उन त्रिपुरों को खेल-ही-खेल में दग्ध कर सका हूँ। जिसे पढ़कर और धारण करके ब्रह्मा ने इस उत्तम सृष्टि की रचना की है। जिसे धारण करके भगवान् शेष सारे विश्व को धारण करते हैं। जिसे धारण करके कूर्मराज शेष को लीलापूर्वक धारण किये रहते हैं। जिसे धारण करके स्वयं सर्वव्यापक भगवान् वायु विश्व के आधार हैं। जिसे धारण करके वरुण सिद्ध और कुबेर धन के स्वामी हुए हैं। जिसे पढ़कर एवं धारण करके स्वयं इन्द्र देवताओं के राजा बने हैं। जिसे धारण करके तेजोराशि स्वयं सूर्य भुवन में प्रकाशित होते हैं। जिसे पढ़कर एवं धारण करके चन्द्रमा महान् बल और पराक्रम से सम्पन्न हुए हैं। जिसे पढ़कर एवं धारण करके महर्षि अगस्त्य सातों समुद्रों को पी गये और उसके तेज से वातापि नामक दैत्य को पचा गये। जिसे पढ़कर एवं धारण करके पृथ्वीदेवी सबको धारण करने में समर्थ हुई हैं.................... rest of the kavach is in the video हमारा सपोर्ट करें - https://www.youtube.com/c/MantraSarov... ________________________________________________________ स्वर - भास्कर पंडित Voice By - Bhaskar Pandit ________________________________________ "लगाइये आस्था की डुबकी " ~ मंत्र सरोवर ~ @MantraSarovar https://www.youtube.com/c/MantraSarov... _________________________________________