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Sheetal Garhi | Mau sahaniya | महाराजा छत्रसाल की सेना इन्हीं गुप्त कमरों में विश्राम किया करती थी!

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Sheetal Garhi | Mau sahaniya | महाराजा छत्रसाल की सेना इन्हीं गुप्त कमरों में विश्राम किया करती थी!

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Sheetal Garhi | Mau sahaniya | महाराजा छत्रसाल की सेना इन्हीं गुप्त कमरों में विश्राम किया करती थी! ‪@Gyanvikvlogs‬ 📌You can join us other social media 👇👇👇 💎INSTAGRAM👉  / gyanvikvlogs   💎FB Page Link 👉  / gyanvikvlogs   शीतल गढ़ी :--यह गढ़ी ग्राम मऊ - सहानियाँ से पश्चिम - दक्षिण की ओर लगभग एक कि.मी. दूर और ग्राम महेवा से डेढ़ कि.मी. दूर पूर्व दिशा की ओर एक पहाड़ी के ऊपर बनी हुई है , जिसे स्थानीय जनता द्वारा शीतल गढ़ी के नाम से पुकारा जाता है । कहा जाता है कि इस भव्य गढ़ी का निर्माण 16 वीं शती ई . में किसी गौंड राजा द्वारा कराया गया था । गढ़ी के प्रत्येक कोने पर एक - एक गुम्बद का निर्माण कर उसको दुर्गीकरण का रूप दिया गया था । गढ़ी में प्रवेश के लिये पांच दरवाजे हैं , इसमें मध्य का दरवाजा मुख्य दरवाजा है । सभी दरवाजे दोहरे मेहराब से होकर उन्हें लता वल्लरी और पुष्पों से सुसज्जित किया गया है । बुन्देला शासनकाल में जब इस गढ़ी पर उनका अधिकार हो गया तब उन्होंने इन अलंकृत ब्रेकिटों के अंतरालों में विविध प्रकार के बुन्देला शैली में भित्तिचित्र चित्रित कर दिये । भवन की छतें अंदर से गजापृष्ठाकार होकर सादा हैं । बुन्देलों ने इस पर अधिकार कर महेवा गेट ( द्वार ) का निर्माण किया एवं महेवा गेट ( द्वार ) जाने के लिए पीछे की ओर एक सादा दरवाजा निर्मित कर इस भाग को एक प्राचीर से आवृत्त किया गया । कला की दृष्टि से यह गौंड और बुन्देला - वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है! महेवा गेट:--महेवा गेट ( द्वार ) झांसी - खजुराहो राजमार्ग पर मऊ - सहानियां से महेवा लिंक रोड पर स्थित है । मूल रूप से महाराजा छत्रसाल की यहां सैनिक छावनी थी । यहां महेवा द्वार , शीतल गढ़ी और बेरछा रानी का मकबरा मुख्य स्मारक हैं । यह द्वार ग्राम मऊ सहानियां से पश्चिम दिशा में लगभग डेढ़ किमी दूर महेवा ग्राम से पूर्व दिशा की ओर लगभग 1 किमी दूर शीतल गढ़ी के पास पहाड़ियों के मध्य स्थित है । कहा जाता है कि इस भव्य द्वार का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने ग्राम मऊ - सहानियां से महेवा जाने के लिए किया था । द्वार के चारों कोनों पर एक - एक अष्टकोणीय गुम्बज बनाया गया है फिर मध्य में मुख्य द्वार का निर्माण किया गया है । विशाल द्वार में सर्वप्रथम दोनों तरफ एक - एक चौकी है , जिसका उपयोग द्वार रक्षक अपने बैठने के लिए करते थे । इन द्वारों के अंतराल भाग में चार - चार दरवाजों से युक्त एक - एक कक्ष का दोनों तरफ निर्माण किया गया है । ऊपर जाने के लिए दोनों तरफ एक - एक सोपान पथ बना हुआ है , जिसकी मदद से द्वार के ऊपर पहुंचकर आसानी से शत्रु की निगरानी रखी जाती थी । बुन्देला वास्तुकला में विशाल द्वार निर्माण शैली का यह एक उत्कृष्ट उदाहरण है! #MahebaGate #SheetalGarhi #Mausahaniya #Gyanvikvlogs #MaharajaChhatarshal #Bundelkhand #महाराजाछत्रसाल_बुंदेलखंड #MadhyaPardeshHeritage #MadhyaParseshTourism #HeritageofMauSahaniya #DhubelaHeritage #MastaniMahal #DhubelaMuseum