ना केक, ना दोस्त… फिर भी बर्थडे बना यादगार! || आचार्य प्रशांत, बाल दिवस विशेष (2025)
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant
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ना केक, ना दोस्त… फिर भी बर्थडे बना यादगार! || आचार्य प्रशांत, बाल दिवस विशेष (2025)
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वीडियो जानकारी: 08.11.2025, संत सरिता सत्र, कोलकाता
Title: ना केक, ना दोस्त… फिर भी बर्थडे बना यादगार! || आचार्य प्रशांत, बाल दिवस विशेष (2025)
📋 Chapters:
00:00 - Intro
02:15 - जन्मदिन पर सबसे बड़ा तोहफ़ा
11:46 - केक क्यों काटना चाहिए?
14:00 - आचार्य जी, आपका बर्थडे कैसे मनता था?
17:02 - आचार्य जी संग लाइव बर्थडे
20:40 - जन्म लिया तो मरेगा
26.05 - सही पेरेंटिंग कैसे करें?
31.04 - कैसे जानें अहंकार की दिशा?
विवरण: इस वीडियो में जन्मदिन, केक और बच्चों की मासूम जिज्ञासाओं के माध्यम से आचार्य प्रशांत बताते हैं कि जन्मदिन का वास्तविक अर्थ पार्टी या केक में नहीं, बल्कि जीवन में निरंतर सच्चाई को चुनने, ईमानदारी से प्रश्न करने, और जिज्ञासा करने में है। आगे परिवार में प्रतिरोध और जिद्द को लेकर आए प्रश्न पर आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि अहंकार सबमें होता है, पर उसकी दिशा ही असली निर्णायक है, क्या वह सत्य की ओर मुड़ रहा है या अंधकार की ओर। वे बताते हैं कि विरोध, नफ़रत और संघर्ष भी हमारे भीतर का ही आईना हैं; उनसे डरना नहीं, बल्कि उनको अपने लिए सीख बनाना है।
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