अमल रा रंग दोहा Amal ra rang કસુંબેના રંગ દોહા #Rang_amal_ra दोहे description में
Ridmal Dan
0:00 / 0:00
अमल रा रंग दोहा Amal ra rang કસુંબેના રંગ દોહા #Rang_amal_ra दोहे description में
37 525 просмотров · 5 лет назад
Ridmal Dan
1,44 тыс. подписчиков
37 525 просмотров · 5 лет назад
अमल रा रंग
कवि अज्ञात
कव उकति मुगति करण हरण विघ्न हमेश।
सारां सूं पहली सदा (थनों) गाढ़ा रंग गणेश।।१।।
जोग ध्यान सजै जबर पारबती रो पीव।
अमलों में दीजै इधक शिव में रंग सधीव।।२।।
अमल अटंपो लीजिये सोमवार के दिन।
शिव में रंग चढ़ाविये मरदों साचे मन।।३।।
सोमवार दिन सातवें गहरा अमल गलाय।
मंत्रियों में मनवार रा भर भर धोबा पाय।।४।।
कीध खयंकर लंर री जीत भयंकर जीत।
अमलों वेळा आपने राम लिछमण रंग।।५।।
बजर अंग गदा बजर बजर कछोटों बजरंग।
भुज रावण रा भांगिया रंग रै हड़मत रंग।।६।।
सारया कारज श्रीराम रा जबर किया हद जंग।
गढ़ तोड़यो लंका तणो (तनों)रंग रै हड़मत रंग।।७।।
दालद तुम ही भांजणा करण पृथ्वी सुख काज।
तीन लोक ऊपर तपै रंग सूरज महाराज।।८।।
रमतो राकस मारियो सरवर पहले तीर।
अमलों वेळा आपनें रंग हो रामा पीर।।९।।
मामड़ सिदु मातेशरी आद सगत अवतार।
समंद हाकड़ो सोखियो (तनों) आवड़ रंग अपार।।१०।।
चारण रावल चकार री लोवड़ियाली में लाज।
अमलों वेळा आपने रंग करणी महाराज।।११।।
वचन निभायो विप्र रो सांढ़ां धणी सुचंग।
अमलों वेळा आपने रतनूं बांका रंग ।।१२।।
सोवे मुद्रा सोवनी मुगट जटा सिर माथ।
अमर हुवो धर ऊपरा (तनों)नित रंग गोरखनाथ।।१३।।
क्षत्रियों अंजसह चांदणो मोह दृढ़ उज्जवल मन्न।
अमलों वेळा आपने रंग सोढ़ा रतन्न।।१४।।
घम घम बाजै घूघरा पड़हड़ धूजै पौड़।
अमलों वेळा आपने रंग बाबू राठौड़।।१५।।
चारण वित्त वाहरू चढ़यो मस्तक बांधै मौड़।
अमलो वेळा आपने रंग बाबू राठौड़।।१६।।
ईष्ट निभायो आपरौ जोधाण नृपत जाण।
अमलो वेळा आपने महाराजा रंग मांन।।१७।।
प्याला भर मद पावणा दैण सुपातां दांन ।
मरुधर जोधाणे महिपत महाराजा रंग मांन।।१८।।
ईढ़ करे कुण आपरी हुवे न दूजों होड़।
मईया थने मोकला केसूं रंग करोड़।।१९।।
अमल अटंका न किया पिया न चम्मड़ पोश।
सिर पर बंध्या न सेवरा रण पर किया न रोश।।२०।।
अमल अरोड़ी फूल मद बाकर मांस बटंक्क।
मिलियों लीजै माधवा गळियों तणा गटंक्क।।२१।।
गढ़ ढ़ाहण गोला गिटण हाथियों दैण हमल्ल।
उण वैळा उतावलौ आवै मित्र अमल्ल।।२२।।
सैण मिळ्यौ बड़ चाह सूं चावळ जितरौ चाख।
मावै अमल लैहणो तीन हजार तलाख।।२३।।
( इति)