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सविधि श्रावक (स्थानकवासी) प्रतिक्रमण, Jain - Shravak (Sthanakwasi) Pratikraman, Devasi Pratikraman

Jain Samani Dr. Suyashnidhi

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सविधि श्रावक (स्थानकवासी) प्रतिक्रमण, Jain - Shravak (Sthanakwasi) Pratikraman, Devasi Pratikraman

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#pratikraman #devasi #shravan #sthanakwasi #सविधि #श्रावक #प्रतिक्रमण #jainism #jain #youtuber #viral #viral_video #youtube #viralvideos #jainchannel आवश्यक सूत्र या प्रतिक्रमण सूत्र जो अत्यंत आवश्यक है उसे जरूर सुनें और करें। प्रतिक्रमण का शाब्दिक अर्थ है पापों से निवृत होना। प्रतिक्रमण का एक और अर्थ अतीत के जीवन का प्रामाणिकता पूर्वक सूक्ष्म निरीक्षण करना। प्रथम और अंतिम तीर्थंकरों का सप्रतिक्रमण धर्म होता है। अतः सभी साधकों के लिए उभय काल आवश्यक आराधना अनिवार्य है। आवश्यक सूत्र या प्रतिक्रमण सूत्र तीर्थंकर भगवंतों के शासन का परम आवश्यक अंग है, आत्म साधना रूप ही है। प्रतिक्रमण से अनेक लाभ है - 1.पाप क्रिया रुक जाती है। 2.श्रद्धा गुण की विशुद्धि होती है। 3.नीच गोत्र कर्म का क्षय और उच्च गोत्र कर्म का उपार्जन होता है। 4.प्रतिक्रमण से व्रत के छिद्र दोष दूर होते हैं, जिससे कर्म प्रवेश के द्वार बंद हो जाते हैं। 5.चरित्र विशुद्ध हो जाते हैं। 6.अतीत और वर्तमान प्रायश्चित की विशुद्धि होती है, जिससे जीव सुखपूर्वक विचरण कर सकता है। 7.प्रतिक्रमण से इच्छाओं का निरोध हो जाता है और परम शांति का अनुभव करता है। नोट: प्रतिक्रमण में पांचवें कायोत्सर्ग आवश्यक में विशेष ध्यान रखें - देवसिय प्रतिक्रमण में चार लोगस्स, राईय प्रतिक्रमण में 2 लोगस्स, पक्खी प्रतिक्रमण में 8 लोगस्स, चातुर्मासिक प्रतिक्रमण में 12 लोगस्स और संवत्सरी प्रतिक्रमण में जयगच्छीय धारणा के अनुसार 16 लोगस्स का ध्यान करें। अलग-अलग परंपरा की अलग-अलग धारणा होने से आप जिस धारणा को follow करते हैं उसके अनुसार उतने लोगस्स का ध्यान करें। Download the Padmodaya Jain Calendar app here: http://bit.ly/3WSvw4n Click here to support our website: http://bit.ly/3Ite2XZ