AbuL Harish I Lion or KarbaLa I ابوالحارث کی وفاداری
Narjis KBI
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शेर अबुल हारिस का वाक़िया कर्बला की जंग से जुड़ी जानवरों की वफ़ादारी की एक बेहद भावुक रिवायत है। इसे संक्षेप में नीचे दिए गए 3 बिंदुओं में समझा जा सकता है:
बचपन का साथ: मौला अली (अ.स.) के ज़माने में एक शेर का बच्चा आया, जिसे इमाम हुसैन (अ.स.) ने पाला और उसका नाम 'अबुल हारिस' रखा। इराक जाने से पहले इमाम ने उसे कर्बला के पास नैनवा के जंगलों में भेज दिया था।बीबी फ़िज़ा की पुकार: 10 मुहर्रम को इमाम हुसैन की शहादत के बाद, जब यज़ीदी फ़ौज ने इमाम के पाक जिस्म को घोड़ों के टापों से कुचलने की कोशिश की, तब इमाम की कनीज़ बीबी फ़िज़ा ने मदद के लिए अबुल हारिस को आवाज़ दी।इमाम के जिस्म की हिफ़ाज़त: आवाज़ सुनते ही शेर दहाड़ता हुआ मैदान-ए-कर्बला पहुंचा, जिससे डरकर यज़ीदी फ़ौज के घोड़े भाग खड़े हुए। इसके बाद शेर रोते हुए इमाम हुसैन के पाक जिस्म के पास बैठ गया और पहरा दिया।
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