कागज़ पर तहरि बारीश|| @Himanshucreate04
Himanshu Raj
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कागज़ पर तहरि बारीश|| @Himanshucreate04
9 просмотров · 3 дн. назад
Himanshu Raj
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🎵 कागज़ पर ठहरी बारिश
रात की खिड़की खुली रही,
चाँद भी कुछ न कह सका,
दिल में जितनी बातें थीं,
कागज़ पर कोई न लिख सका।
एक पुरानी याद के नीचे,
कुछ अधूरे शब्द मिले,
जिनको पढ़कर लगा कि जैसे,
बीते कल के निशान मिले।
कागज़ पर ठहरी बारिश,
आँखों में कुछ ख़्वाब रहे,
वक्त गुज़रता रहा मगर,
कुछ पल वहीं बेहिसाब रहे।
जो बातें लफ़्ज़ न बन पाईं,
वो दिल में लिखी रह गईं,
कुछ यादें धुँधली होती गईं,
कुछ यादें वहीं रह गईं।
कमरे में अब शोर नहीं है,
घड़ी की आवाज़ सुनाई दे,
जिन रास्तों पर हँसते थे हम,
वहाँ शाम अकेली दिखाई दे।
मेज़ पर रखी उस तस्वीर में,
बीता हुआ एक दिन है,
चेहरे पर हल्की हँसी सही,
पर आँखों में सावन है।
कागज़ पर ठहरी बारिश,
आँखों में कुछ ख़्वाब रहे,
वक्त गुज़रता रहा मगर,
कुछ पल वहीं बेहिसाब रहे।
जो बातें लफ़्ज़ न बन पाईं,
वो दिल में लिखी रह गईं,
कुछ यादें धुँधली होती गईं,
कुछ यादें वहीं रह गईं।
सुबह हुई तो धूप ने आकर,
कमरे का दरवाज़ा खोला,
कल तक जो ख़ामोशी थी,
आज हवा ने उससे कुछ बोला।
हर बीते पल का मतलब,
आज समझ में आता है,
जो वक्त कभी लौटता नहीं,
वो यादों में मिल जाता है।
कितने पन्ने खाली छोड़े,
कितने ख़त बेनाम रहे,
दिल के सारे छोटे किस्से,
दिल के अंदर ही तमाम रहे।
अब भी जब बारिश होती है,
खिड़की कुछ कह जाती है,
एक पुरानी धुन की तरह,
याद कहीं रह जाती है।
कागज़ पर ठहरी बारिश,
अब धीरे-धीरे थम जाए,
दिल में जितनी यादें बाकी,
गीत बनकर बाहर आएँ।
जो बातें लफ़्ज़ न बन पाईं,
वो गीतों में ढल जाएँ,
बीते कल की धुँधली यादें,
नई सुबह तक चल जाएँ।
कागज़ पर ठहरी बारिश,
एक अधूरा अफ़साना है,
कुछ यादों का खो जाना,
कुछ यादों का रह जाना है।
रात की खिड़की खुली रहेगी,
चाँद भी शायद आएगा,
कागज़ पर जो दर्द लिखा है,
गीत बनकर गाया जाएगा। ❤️🎶