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भक्ति आंदोलन | HISTORY | LUCENT GK | GOVT EXAM 2026

Vijay study & vlog и VIJAY BHAKTI CHANNEL

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भक्ति आंदोलन | HISTORY | LUCENT GK | GOVT EXAM 2026

47 просмотров · 8 дней назад
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#history #lucentgk 📚 भक्ति आंदोलन — महत्वपूर्ण Notes 1. भक्ति आंदोलन क्या था? भक्ति आंदोलन मध्यकालीन भारत का एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन था। इसमें ईश्वर की भक्ति, प्रेम और व्यक्तिगत साधना पर जोर दिया गया। जाति-पाति, आडंबर और कर्मकांड की आलोचना करने वाले संतों ने इसे लोकप्रिय बनाया। दक्षिण भारत से शुरू होकर यह आंदोलन उत्तर भारत में व्यापक रूप से फैला। 2. भक्ति आंदोलन का प्रारंभ दक्षिण भारत में आलवार और नयनार संतों ने भक्ति परंपरा को मजबूत किया। आलवार → भगवान विष्णु के भक्त। नयनार → भगवान शिव के भक्त। इन संतों ने मुख्यतः तमिल भाषा में भक्ति साहित्य की रचना की। 3. भक्ति आंदोलन की प्रमुख धाराएँ सगुण भक्ति ईश्वर को साकार रूप में माना गया। प्रमुख आराध्य → राम और कृष्ण। प्रमुख संत: रामानंद, तुलसीदास, सूरदास, मीराबाई आदि। निर्गुण भक्ति ईश्वर को निराकार माना गया। मूर्ति पूजा और बाहरी आडंबर का विरोध किया गया। प्रमुख संत: कबीर, गुरु नानक, दादू दयाल आदि। ⭐ प्रमुख संत एवं उनके विचार रामानंद उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत। भगवान राम की भक्ति पर जोर। उनके शिष्यों में कबीर, रविदास आदि के नाम परंपरा में मिलते हैं। उन्होंने भक्ति को आम लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत। जन्मस्थान के रूप में सामान्यतः काशी से जोड़ा जाता है। गुरु → रामानंद की परंपरा से जोड़ा जाता है। जाति-पाति, धार्मिक आडंबर और अंधविश्वास का विरोध। उनकी रचनाएँ मुख्यतः साखी, सबद और रमैनी के रूप में प्रसिद्ध हैं। कबीर की वाणी का प्रमुख संकलन → बीजक। गुरु नानक सिख धर्म के प्रथम गुरु। जन्म → तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब)। एकेश्वरवाद और मानव समानता पर जोर। उन्होंने जातिगत भेदभाव और धार्मिक आडंबर का विरोध किया। उनकी शिक्षाओं का प्रमुख संकलन बाद में गुरु ग्रंथ साहिब में हुआ। रविदास निर्गुण संत परंपरा के प्रमुख संत। जातिगत भेदभाव का विरोध। उन्होंने समानता और भक्ति पर जोर दिया। मीराबाई को उनकी शिष्या के रूप में परंपरा में माना जाता है। चैतन्य महाप्रभु बंगाल और ओडिशा में कृष्ण भक्ति के प्रचारक। भक्ति में प्रेम और कीर्तन को विशेष महत्व दिया। गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़े। मीराबाई कृष्ण की अनन्य भक्त। उनकी भक्ति मुख्यतः सगुण कृष्ण भक्ति की धारा में आती है। उन्होंने कृष्ण को अपना आराध्य और प्रियतम माना। उनकी भक्ति रचनाएँ पदों के रूप में प्रसिद्ध हैं। सूरदास कृष्ण भक्ति के प्रमुख कवि। उनकी प्रसिद्ध रचना → सूरसागर। वे वल्लभाचार्य की परंपरा से जुड़े माने जाते हैं। तुलसीदास राम भक्ति के प्रमुख कवि। प्रसिद्ध रचना → रामचरितमानस। अन्य प्रमुख रचनाएँ → विनय पत्रिका, कवितावली आदि। रामचरितमानस की भाषा → अवधी। नामदेव महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा के प्रमुख संत। भगवान विठ्ठल की भक्ति से जुड़े। उनकी रचनाओं का प्रभाव महाराष्ट्र की संत परंपरा में महत्वपूर्ण रहा। तुकाराम महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत। विठ्ठल भक्ति के प्रमुख प्रचारक। उनकी रचनाएँ अभंग कहलाती हैं। गुरु घासीदास / दादू दयाल दादू दयाल निर्गुण भक्ति परंपरा के प्रमुख संत थे। उन्होंने जाति-पाति और धार्मिक भेदभाव का विरोध किया। उनके अनुयायी दादू पंथ से जुड़े। 📝 परीक्षा के लिए One-Liner Facts आलवार → विष्णु भक्त नयनार → शिव भक्त कबीर → निर्गुण भक्ति मीराबाई → कृष्ण भक्ति तुलसीदास → राम भक्ति सूरदास → कृष्ण भक्ति चैतन्य महाप्रभु → कृष्ण भक्ति एवं कीर्तन गुरु नानक → सिख धर्म के प्रथम गुरु तुकाराम → अभंग कबीर की प्रमुख रचना/संकलन → बीजक तुलसीदास → रामचरितमानस सूरदास → सूरसागर आलवार और नयनार → दक्षिण भारत निर्गुण भक्ति → निराकार ईश्वर सगुण भक्ति → साकार ईश्वर 🎯 RRB/SSC में याद रखने वाली Trick “कबीर–नानक–रविदास = निर्गुण” “राम–कृष्ण–मीरा–सूर–तुलसी = सगुण” #viralvideo #viralvideos