Перейти к содержимому

ज्ञानगीत - परछाईयां

बोधि वार्ता

0:00 / 0:00

ज्ञानगीत - परछाईयां

686 просмотров · 9 дн. назад
बोधि वार्ता
36,6 тыс. подписчиков
686 просмотров · 9 дн. назад
हैं सारी ये परछाईयां मेरी जल रहीं पिघल रहीं बदल रहीं मचल रहीं चल रहीं ढल रहीं जादू सी छल रहीं बेख्वाब हैं गहराईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी खुले रास्ते थे मोड कितने बेबस पडा दिन खामोश रातें कितनी चुप सी हैं मेरी ये बातें राह तकती हैं तन्हाईयां मेरी राह तकती हैं तन्हाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी अजब सी रौशनी में खो रहीं, जागती आँखों में सो रहीं, खुद से मिलकर रो रहीं झूठी सी हैं सच्चाईयां मेरी झूठी सी हैं सच्चाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी आग ये सोच की, राख है ख्याल की टूटती दीवार है हर सवाल की आखों का धुआँ छटने लगा मेरा अक्स मुझमें मिटने लगा रास आ रहीं अब रुसवाईंयां मेरी रास आ रहीं अब रुसवाईंयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी आईने से उतर हवाओं में बिखर गईं, कल मेरी थीं, आज मुझसे मुकर गईं तस्वीर है जिसकी तू वो भी हैरान है, साया मेरा क्यूँ मुझसे ही अंजान है आसमां छू रहीं ऊँचाईयां मेरी आसमां छू रहीं ऊँचाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी जल रहीं पिघल रहीं बदल रहीं मचल रहीं चल रहीं ढल रहीं जादू सी छल रहीं बेख्वाब हैं गहराईयां मेरी बेख्वाब हैं गहराईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी हैं सारी ये परछाईयां मेरी गीत डाऊनलोड करें : https://gyanmarg.guru/gg ज्ञानमार्ग प्रवेशद्वार : https://gyanmarg.guru #ज्ञानगीत #अध्यात्म #आत्मन #ब्रह्मन #अद्वैत #वेदांत #ज्ञानमार्ग #ज्ञानयोग