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मिथिला में जितिया नहाय-खाय की अनोखी परंपरा,जितिया में मरुआ रोटी क्यों खाई जाती है?#Jitiya #trending

Parinita Jha

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मिथिला में जितिया नहाय-खाय की अनोखी परंपरा,जितिया में मरुआ रोटी क्यों खाई जाती है?#Jitiya #trending

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Parinita Jha
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मिथिला में जितिया नहाय-खाय की अनोखी परंपरा,जितिया में मरुआ रोटी क्यों खाई जाती है? ओठगन क्यों किया जाता है? जानिए जितिया की परंपरा नहाय-खाय में मरुआ की रोटी खाने की परंपरा कुछ क्षेत्रों, खासकर मिथिला-बिहार के लोकाचार में मिलती है। इसका कारण मुख्यतः स्थानीय परंपरा और सात्त्विक भोजन है। 🌾 मरुआ स्थानीय पारंपरिक अनाज है, इसलिए पुराने ग्रामीण जीवन में इसका विशेष स्थान रहा है। 🍽️ नहाय-खाय के दिन व्रत से पहले सादा, घर का बना भोजन लेने की परंपरा रही है। 🌿 मरुआ को पौष्टिक अनाज माना जाता है और यह लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला भोजन है। 🙏 लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर क्षेत्र या हर परिवार में मरुआ की रोटी अनिवार्य नहीं होती; नहाय-खाय के नियम और भोजन परंपरा के अनुसार बदलते हैं। जितिया व्रत में ओठगन वह समय होता है जब व्रती महिलाएँ निर्जला व्रत शुरू होने से पहले रात में भोजन-पानी ग्रहण करती हैं। इसके बाद सूर्योदय से लेकर व्रत पूरा होने तक अन्न और जल का त्याग किया जाता है। “जितिया के ओठगन में मरुआ की रोटी सिर्फ भोजन नहीं, मिथिला की पुरानी खान-पान परंपरा और लोकसंस्कृति की एक झलक है।” 🌾🙏#Jitiya #JitiyaVrat #JivitputrikaVrat #JitiyaOthgan #Othgan #NahayKhay #Mithila #MithilaCulture #MaithiliCulture