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चादर झीणी II Chadar jhini II By Prahlad Singh Tipaniya

Prahlad Singh Tipanya Official

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चादर झीणी II Chadar jhini II By Prahlad Singh Tipaniya

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चादर झीणी ll Chadar Jhini ll by prahlad Singh Tipanya ___________________________________________________________________ Credits Main Vocal : Padmashri Prahlad Singh Tipanya Chours : Ashok Tipaniya and Shanti Devi Tipanya Violin : Devnarayan Saroliya Dholak : Ajay Tipaniya Harmonium : Dharmandra Tipaniya Timki : Manglesh Mangroliya Video : Mayank Tipaniya, Pritam Tipaniya And Sachin Sound editing : Mayank Tipaniya _______________________________________________________________________ साखी - सतगुरू बड़े सुनार है , परखें वस्तु भण्डार । सुरति निरति मिलाय के , मेटि डारे खुटकार।।1 ।। सतगुरू तो सद् भाव है , जो अस भेद बताय । धन - भाग - धन - शिष्य जेहि , जो ऐसी सुधि पाय ।।2 ।। भजन - म्हारी सदा राम रस बीनी चादर झीणी , रंग झीणी हो , 1 . अष्ट कमल दल चरखा चाले , पाँच तत्व गुण तीनी , कर्म की पूणी कांतन बैठी , कुकरी , सुरत महीणी ॥ 2. इंगला पिंगला ताना कीनो , सुखमण या भर दीनी , नवदस मास या बीतण लागे , ठीक ठाक कर बीनी ॥ 3. या चादर धोबी के दीनी , शब्द ताल धर दीनी । सुरत शिला पर पकड़ पछाटी , इन वद उजली कीनी ॥ 4. या चादर रंगरेज के दीनी , भांति - भांति रंग बीनी । प्रेम पति का रंग चढ़ाया , पीली पीताम्बर कीनी ॥ 5. या चादर सुरनर मुनि ओढ़ी , ओढ़ के मेली कीन्हीं , अर्जुन ओढ़ मरम नहीं जाना , मूरख मैली कीनी ॥ 6. ध्रुव ओढी प्रहलाद ने ओढ़ी , सुखदेव निर्मल कीनी , साहब कबीर ने जुगत से ओढ़ी , ज्यों की त्यों धर दीनी ॥