चादर झीणी II Chadar jhini II By Prahlad Singh Tipaniya
Prahlad Singh Tipanya Official
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चादर झीणी ll Chadar Jhini ll by prahlad Singh Tipanya
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Credits
Main Vocal : Padmashri Prahlad Singh Tipanya
Chours : Ashok Tipaniya and Shanti Devi Tipanya
Violin : Devnarayan Saroliya
Dholak : Ajay Tipaniya
Harmonium : Dharmandra Tipaniya
Timki : Manglesh Mangroliya
Video : Mayank Tipaniya, Pritam Tipaniya And Sachin
Sound editing : Mayank Tipaniya
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साखी -
सतगुरू बड़े सुनार है , परखें वस्तु भण्डार ।
सुरति निरति मिलाय के , मेटि डारे खुटकार।।1 ।।
सतगुरू तो सद् भाव है , जो अस भेद बताय ।
धन - भाग - धन - शिष्य जेहि , जो ऐसी सुधि पाय ।।2 ।।
भजन -
म्हारी सदा राम रस बीनी चादर झीणी , रंग झीणी हो ,
1 . अष्ट कमल दल चरखा चाले , पाँच तत्व गुण तीनी ,
कर्म की पूणी कांतन बैठी , कुकरी , सुरत महीणी ॥
2. इंगला पिंगला ताना कीनो , सुखमण या भर दीनी ,
नवदस मास या बीतण लागे , ठीक ठाक कर बीनी ॥
3. या चादर धोबी के दीनी , शब्द ताल धर दीनी ।
सुरत शिला पर पकड़ पछाटी , इन वद उजली कीनी ॥
4. या चादर रंगरेज के दीनी , भांति - भांति रंग बीनी ।
प्रेम पति का रंग चढ़ाया , पीली पीताम्बर कीनी ॥
5. या चादर सुरनर मुनि ओढ़ी , ओढ़ के मेली कीन्हीं ,
अर्जुन ओढ़ मरम नहीं जाना , मूरख मैली कीनी ॥
6. ध्रुव ओढी प्रहलाद ने ओढ़ी , सुखदेव निर्मल कीनी ,
साहब कबीर ने जुगत से ओढ़ी , ज्यों की त्यों धर दीनी ॥