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आँखों में बस के दिल में समा कर चले गए ANKHO ME BAS KE DIL MEY SAMA KAR CHALEY GAE

Atmbodh आत्मबोध

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आँखों में बस के दिल में समा कर चले गए ANKHO ME BAS KE DIL MEY SAMA KAR CHALEY GAE

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Atmbodh आत्मबोध
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आँखों में बस के दिल में समा कर चले गए ख़्वाबीदा ज़िंदगी थी जगा कर चले गए -- जिगर मुरादाबादी की इस अमर ग़ज़ल को गाया है श्री गोपाल कृष्ण रंजन जी ने