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अब जाग देखो सुख जागनी, ए सुख सोहागिन जोग ★ Ab Jag Dekho Sukh Jagni, Ae Sukh Sohagin Jog ★ प्रेरित जी

Jagni Brahmand

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अब जाग देखो सुख जागनी, ए सुख सोहागिन जोग ★ Ab Jag Dekho Sukh Jagni, Ae Sukh Sohagin Jog ★ प्रेरित जी

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Jagni Brahmand
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१. अब जाग देखो सुख जागनी, ए सुख सोहागिन जोग। तीन लीला चौथी घर की, इन चारों को यामे भोग।। २. अब दुख न देऊं फूल पांखड़ी, देखूं सीतल नैन। उपजाऊं सुख सब अंगों, बोलाऊं मीठे बैन।। ३. प्रीतम मेरे प्राण के, अंगना मन कलपे खेल देखते, आतम नूर। सो ए दुख करूं सब दूर।। ४. लागोगे जो दुख को, तो दुख याद करो जो निज सुख, तो दुख तुमको लागसी। तुमचें भागसी।। ५. तारतम का बल कोई न जाने, मूल सरूप के चित्त की बातें, एक जाने मूल सरूप। तारतम में कई रूप।। ६. इन्द्रावती के मैं अंगे संगे, जो अंग सौंपे इंद्रावती को, इंद्रावती मेरा अंग। ताए प्रेमें खेलाऊं रंग।। कलस हिन्दुस्तानी-प्रकरण-२३ 54वाँ वार्षिक महोत्सव 2026,श्री निजानंद आश्रम,रत्नपुरी 🚩शेयर करने की सेवा करे❣️चैनल पर नये है तो चैनल को सब्सक्राइब🔔करना न भूले।