सबने छोड़ा साथ, भोले ने विष पी लिया | नीलकंठ महादेव की भावपूर्ण कहानी | हर हर महादेव 🙏 | Shiv Bhajan
Dil Tak Dhun (Bhakti)
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सबने छोड़ा साथ, भोले ने विष पी लिया | नीलकंठ महादेव की भावपूर्ण कहानी | हर हर महादेव 🙏 | Shiv Bhajan
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Dil Tak Dhun (Bhakti)
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जब दुनिया को *अमृत चाहिए था, सब साथ खड़े थे…*
लेकिन जब समुद्र मंथन से *हलाहल का विष* निकला, तो हर कोई पीछे हट गया।
तब महादेव आगे आए…
न कोई सवाल किया, न अपने प्राणों की चिंता की।
उन्होंने संसार को बचाने के लिए विष अपने कंठ में धारण कर लिया और *नीलकंठ* कहलाए। 🔱
और जब विष उनके कंठ में उतरने लगा, तब **माँ गौरी ने शिव का कंठ थामकर उन्हें संभाला**।
एक तरफ महादेव का त्याग था, दूसरी तरफ माँ का प्रेम और साया। ❤️
यह सिर्फ समुद्र मंथन की कथा नहीं…
यह उस विश्वास की कहानी है जो कहती है—
**जब दुनिया साथ छोड़ दे,
तब भी महादेव को पुकार लेना।
जो तुम्हारा दर्द किसी से कहे बिना समझते हैं,
वो भोलेनाथ हैं।** 🥺🔱
**सबने छोड़ा साथ… भोले ने विष पी लिया।
हर हर महादेव! 🙏
ॐ नमः शिवाय। 🕉️**
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जब दुनिया को अमृत चाहिए था…
सब साथ खड़े थे…
लेकिन जब सामने आया **हलाहल का ज़हर**,
तो हर कोई पीछे हट गया…
कोई देव आगे न आया…
कोई दानव आगे न आया…
तब एक भोला खड़ा हुआ…
जिसने पूछा भी नहीं—
*“ये विष मुझे ही क्यों पीना है?”*
बस इतना कहा…
**“अगर मेरे पीने से ये संसार बच सकता है…
तो ये विष भी मुझे स्वीकार है…”**
🔱 *हर हर महादेव…*
**सबने छोड़ा साथ… भोले ने विष पी लिया,
दुनिया के लिए अपना सुख-दुःख सब ही भूल गया।
कंठ हुआ नीला, फिर भी चेहरे पे मुस्कान थी,
दुनिया जिसे मौत कहे… भोले के लिए वो दान थी।**
**सबने छोड़ा साथ…
भोले ने विष पी लिया…
हर हर महादेव…**
देवों को अमृत चाहिए था,
दानवों को भी अमृत की आस,
मिलकर दोनों मथने लगे थे,
सागर दिन और रात।
मंदराचल बना मथानी,
वासुकी बनी रस्सी,
सबकी आँखों में अमृत का सपना,
सबकी अपनी इच्छा थी।
एक तरफ देव, दूजी तरफ दानव,
चलता रहा मंथन,
किस्मत ने लेकिन पहले भेजा,
एक भयंकर विष का कण।
कण से ज्वाला, ज्वाला से तूफान,
जलने लगा संसार…
**तब सबने मुँह फेर लिया,
कौन बनेगा जिम्मेदार?**
माँ ने बच्चे छुपा लिए,
देवों ने आँखें बंद करीं,
धरती रोई, आकाश काँपा,
नदियाँ भी जैसे डर गईं।
सबको अपना जीवन प्यारा था…
सबको अपनी साँस प्यारी…
**पर एक महादेव थे…
जिन्हें दूसरों की साँस प्यारी थी।**
कैलाश पर बैठे भोले ने,
जब जग की पुकार सुनी,
आँखों में करुणा भर आई,
दुनिया की पीड़ा जानी।
ना कोई अपना, ना कोई पराया,
सबमें शिव को देखा,
जिस जग ने उन्हें कभी कुछ ना दिया,
उस जग का दर्द भी देखा।
महादेव धीरे-धीरे उठे,
हाथ में विष को लिया,
माँ पार्वती देखती रहीं,
शिव ने हलाहल पी लिया।
एक घूँट…
और तीनों लोक शांत…
दूसरा घूँट…
और ज्वाला शांत…
लेकिन विष नीचे उतरता,
तो सृष्टि का अंत था।
माँ गौरी ने देखा शिव को,
कंठ हुआ नीला सारा,
माँ ने तुरंत अपना हाथ बढ़ाया,
थाम लिया कंठ तुम्हारा।
**“नाथ… इतना दर्द अकेले मत सहना,
दुनिया बचानी है तो मुझे भी साथ रखना…”**
माँ ने विष को कंठ में रोका,
शिव का प्राण बचाया,
एक तरफ थे त्याग के सागर,
दूजी ओर माँ का साया।
**शिव ने जग को जीवन दिया,
गौरी ने शिव को संभाला,
तभी तो शिव कहलाए शंकर,
तभी शक्ति कहलायी भवानी।**
आज भी कितने लोग हमारे,
दर्द में अकेले रोते हैं…
जब तक सुख हो साथ हमारे,
सब अपने-अपने होते हैं।
लेकिन जब मुश्किल आ जाए,
सब कहते हैं—“हम क्या करें?”
जब कोई आँसू लेकर आए,
कितने उसके साथ खड़े?
**तब याद करो उस भोले को,
जिसने दुनिया का दर्द लिया…
जिसके हिस्से आया विष,
फिर भी सबको अमृत दिया।**
**जब कोई तुम्हारा साथ न दे,
बस शिव का नाम लिया करो…
जब दर्द बहुत बढ़ जाए मन में,
“भोले” कहकर रो लिया करो…**
**जो दुनिया से अपना दर्द छुपाए,
शिव उसको भी पहचानते हैं…
जो चुपचाप आँसू पी जाए,
भोले उसके दर्द को जानते हैं…**
**सबने छोड़ा साथ…
भोले ने विष पी लिया…
तुम भी अकेले मत रोना…
भोले को अपना मान लेना…** 🥺🔱
**जिसने जग के लिए विष पीया,
वो मेरा भोला है…
जिसने दर्द किसी को बताया नहीं,
वो मेरा भोला है…**
**ना ताज चाहिए, ना सिंहासन,
ना दुनिया की शान चाहिए…
बस भोले का हाथ सिर पर हो,
और क्या भगवान चाहिए…**
**हलाहल पीकर नीलकंठ बने,
दुनिया का उद्धार किया…
सबने छोड़ा साथ मगर,
भोले ने संसार बचा लिया।**
**सबने छोड़ा साथ… भोले ने विष पी लिया,
अपने कंठ में दुनिया का हर दर्द सी लिया।
हम क्या हैं उनके आगे, बस इतना याद रखना—
जब दुनिया छोड़ दे साथ… “महादेव” को पुकार लेना।**
**हर हर महादेव… 🔱
हर हर महादेव…
ॐ नमः शिवाय…
ॐ नमः शिवाय…**
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