अष्टावक्र गीता | अध्याय 2 विस्मय योगअहो! मैं मुक्त हूँआत्म-बोध का रहस्यन बंधन #audiobook #audio
Vedant Audio и Vedant Ganga
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अष्टावक्र गीता | अध्याय 2 विस्मय योगअहो! मैं मुक्त हूँआत्म-बोध का रहस्यन बंधन #audiobook #audio
5 просмотров · 5 дней назад
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इस वीडियो में अष्टावक्र गीता के द्वितीय अध्याय “विस्मय योग” का सार प्रस्तुत किया गया है। यह अध्याय राजा जनक के आत्म-बोध, “अहो” के विस्मय और शुद्ध चेतना के अनुभव का वर्णन करता है। जानिए कैसे जनक कहते हैं — “मैं न देह हूँ, न मन; मैं न कर्ता हूँ, न भोक्ता; मैं न बद्ध हूँ, न मुक्त; मैं शुद्ध चेतना हूँ, साक्षी हूँ, अनंत हूँ।”
अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदांत का अमूल्य ग्रंथ है। यह वीडियो आपको आत्म-बोध, मोक्ष, साक्षी भाव, और जीवन्मुक्ति का सरल संदेश देता है। अगर आप आध्यात्मिक साधना, ध्यान, और स्वयं की खोज में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है।
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