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सिवाना किला भाग 1 (56 पहाड़ियों से गिरा किला) आखिर कितने हुए जौहर इस किले में ? शाम 6:00 के बाद 😰🔎📍

AZAD BHARAT 84

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सिवाना किला भाग 1 (56 पहाड़ियों से गिरा किला) आखिर कितने हुए जौहर इस किले में ? शाम 6:00 के बाद 😰🔎📍

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सिवाना किला भाग 1 (56 पहाड़ियों से गिरा किला) आखिर कितने हुए जौहर इस किले में ? शाम 6:00 के बाद 😰🔎📍 #subscribe #siwana राजस्थान के बालोतरा (पूर्व में बाड़मेर) जिले में हल्देश्वर की पहाड़ियों पर स्थित सिवाना का किला (Siwana Fort) अपने ऐतिहासिक बलिदानों और दो प्रसिद्ध साकों (जौहर और केसरिया) के लिए जाना जाता है। मारवाड़ के राजाओं की संकटकालीन राजधानी रहा यह दुर्ग अपने गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। सिवाना दुर्ग का प्रथम साका (1308 ई.):दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने 1308 ई. में इस दुर्ग पर आक्रमण किया था। उस समय यह किला जालौर के चौहान सरदार शीतलदेव (सातलदेव) के अधीन था। भीषण युद्ध में शीतलदेव और उनके सैनिकों ने केसरिया बाना पहनकर लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की, और रानी मेणादे के नेतृत्व में राजपूत वीरांगनाओं ने अग्नि कुंड में कूदकर 'जौहर' किया था। इस विजय के बाद खिलजी ने इसका नाम बदलकर 'खैराबाद' रख दिया था। सिवाना दुर्ग का दूसरा साका:मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में सिवाना दुर्ग पर जोधपुर के राव कल्ला राठौड़ (कल्याणमल) का अधिकार था। अकबर के आदेश पर मारवाड़ के राजा उदयसिंह (मोटा राजा) ने मुगल सेना के साथ सिवाना पर आक्रमण किया। युद्ध में राव कल्ला राठौड़ ने केसरिया किया और उनकी रानियों ने जौहर की रस्म अदा की। निर्माण: इस 1000 वर्ष पुराने किले का निर्माण 10वीं शताब्दी में परमार राजा भोज के पुत्र वीर नारायण द्वारा करवाया गया था। 1संकटकालीन राजधानी: मारवाड़ के शासक राव चंद्रसेन ने मुगलों से संघर्ष के दौरान इसी दुर्ग को अपना मुख्य केंद्र और शरण स्थली बनाया था। स्थापत्य: इस किले के दूसरे द्वार के अंदर हाथों के निशान बने हुए हैं, जिन्हें आज भी जौहर के प्रमाण के रूप में देखा जाता है। किले में एक बड़ा भांडेलाव तालाब है, जिसका पानी कभी नहीं सूखता। #shorts #shortvideo #viral #song #viralvideo #viral #youtubeshorts #trending #reels #motivation #instagram #siwana #kila#fort#freefire