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लुप्त होती मारवाड़ की कला जो अब देखने को नहीं मिलती ये गायन शैली । दरिया ओर रूखमो की सुरीली आवाज़

Om Joshi , Barmer

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लुप्त होती मारवाड़ की कला जो अब देखने को नहीं मिलती ये गायन शैली । दरिया ओर रूखमो की सुरीली आवाज़

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Om Joshi , Barmer
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बाड़मेर जिले के विशाला और दुधाबेरी गांव की दो बहने रुकमा और दरिया ने अपने सुरीले कण्ठ से लुप्त होती इस गायन शैली को जीवित रखा है । वास्तव में यही लोग संस्कृति के संवाहक है । शादी ब्याह के अवसरों पर अपने यजमानों के घरों में ढोल के साथ गाये जाने वाले ये गीत हम तल्लीनता से सुनते हैं तो मंत्रमुग्ध हो जाते हैं । मारवाड़ क्षेत्र की ये अनूठी कला अब अपनी अंतिम सांसे गिन रही है । आइए हम सब मिलकर लुप्त होती इस कला को बैंड और डीजे के स्थान पर इन्हें अपनाएं । सादर , ओम जोशी बाड़मेर