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Shreemad Bhagwat Geeta Addhyay-2 Sankhya Yog.#geeta #dwitiya #Addhyay #sankhyayoga #jaishreekrishna

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Shreemad Bhagwat Geeta Addhyay-2 Sankhya Yog.#geeta #dwitiya #Addhyay #sankhyayoga #jaishreekrishna

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About Indian :Shreemad Bhagwat Geeta Addhyay-2 Sankhya Yog.#geeta #dwitiya #Addhyay #sankhyayoga #jaishreekrishna श्रीमद भगवद् गीता के द्वितीय अध्याय में मानव को यह सिख मिलती है कि वह अपने कर्तव्यों को समझें और उन्हें निर्विघ्नता से पालन करें। इस अध्याय में कर्मयोग की महत्ता को बताया गया है, जिसके अनुसार मानव को कर्म करते हुए फल की आकांक्षा न करते हुए उसे निष्काम कर्म की भावना में जीना चाहिए। कर्मयोग में कहा गया है कि कर्म करना हमारा धर्म है, परंतु फल की चिंता न करते हुए केवल कर्म को समर्पित करना चाहिए। इससे मनुष्य को आत्मशान्ति, संतुष्टि और समाधान की प्राप्ति होती है।