लाग्या रहिये प्रेमी मेरा भाई रे, बणत बणत तेरी बण जाई रे। सत्संग गोपाल वास (चरखी दादरी) ।
आनन्द शान्ति
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लाग्या रहिये प्रेमी मेरा भाई रे, बणत बणत तेरी बण जाई रे। सत्संग गोपाल वास (चरखी दादरी) ।
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आनन्द शान्ति
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