भारतीय अपवाह प्रणाली (Indian drainage system)Part B Class 13
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अपवाह प्रणाली (Drainage System) किसी क्षेत्र के जल प्रवाह (Water Flow) के तंत्र को कहते हैं, जिसके माध्यम से वर्षा का पानी, बर्फ पिघलने से बना पानी या भूजल नदियों, नालों और उनकी सहायक नदियों के जरिए एक निश्चित दिशा में बहता है।
सरल शब्दों में, नदियों और उनकी सहायक धाराओं के जाल को ही 'अपवाह प्रणाली' या 'नदी तंत्र' कहा जाता है।
यहाँ अपवाह प्रणाली से जुड़े कुछ मुख्य और बुनियादी बिंदु दिए गए हैं:
1. मुख्य शब्दावली (Basic Terms)
• अपवाह द्रोणी (Drainage Basin / River Basin): एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा जिस पूरे क्षेत्र का पानी बहाकर लाया जाता है, उस पूरे इलाके को उस नदी की 'अपवाह द्रोणी' या 'बेसिन' कहते हैं।
• जल विभाजक (Water Divide): कोई भी ऊँचा क्षेत्र (जैसे पहाड़ या उच्च भूमि) जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को एक-दूसरे से अलग करता है, उसे जल विभाजक कहते हैं। उदाहरण के लिए— अंबाला शहर, सिंधु और गंगा नदी तंत्र के बीच एक जल विभाजक है।
2. अपवाह प्रतिरूप (Drainage Patterns)
नदियाँ जिस भूभाग पर बहती हैं, वहाँ की ढलान, चट्टानों की बनावट और जलवायु के आधार पर अलग-अलग आकार या डिज़ाइन बनाती हैं, जिन्हें अपवाह प्रतिरूप कहते हैं। इसके मुख्य प्रकार हैं:
• द्रुमाकृतिक (Dendritic): यह पेड़ की शाखाओं जैसा दिखता है। यह वहाँ बनता है जहाँ की ज़मीन एक जैसी ढलान वाली होती है (जैसे गंगा नदी)।
• जालीदार (Trellis): जब प्राथमिक सहायक नदियाँ एक-दूसरे के समानांतर बहती हैं और द्वितीयक नदियाँ उन्हें समकोण (90 डिग्री) पर मिलती हैं।
• आयतकार (Rectangular): यह अत्यधिक संधित (strongly jointed) पथरीले भूभाग पर बनता है।
• अरीय (Radial): जब नदियाँ किसी केंद्रीय गुंबद या पहाड़ी से निकलकर अलग-अलग दिशाओं में बाहर की ओर बहती हैं (जैसे अमरकंटक पहाड़ी से निकलने वाली नदियाँ)।