घड़ा ज्यों नीर का फूटा, पत्र ज्यों डार से टूटा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2026)
शास्त्रज्ञान
0:00 / 0:00
घड़ा ज्यों नीर का फूटा, पत्र ज्यों डार से टूटा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2026)
12 409 просмотров · 3 месяца назад
शास्त्रज्ञान
1,05 млн подписчиков
12 409 просмотров · 3 месяца назад
🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं?
लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/en/join-l...
📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं?
फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?...
📄 AP फ्रेमवर्क
आचार्य प्रशांत के दर्शन का पूरा विवरण 🔥
🔗 यहाँ पढ़ें: https://acharyaprashant.org/hi/ap-fra...
➖➖➖➖➖➖
#acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #fear #pain #ego #ahankar #अध्यात्म #spirituality
वीडियो जानकारी: 12.03.2026, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा
Title : घड़ा ज्यों नीर का फूटा, पत्र ज्यों डार से टूटा || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर (2026)
➖➖➖➖➖➖
विवरण:
यह वीडियो संत कबीर के प्रसिद्ध भजन “घड़ा ज्यों नीर का फूटा, पत्र ज्यों डार से टूटा” की पंक्तियों पर आधारित है। आचार्य प्रशांत जी समझाते हैं कि जीवन की घटनाएँ दुःख का कारण नहीं होतीं, बल्कि उनसे जुड़ा हमारा अहंकार ही पीड़ा पैदा करता है। आचार्य जी बताते हैं कि प्रकृति में न जन्म कोई विशेष घटना है और न मृत्यु कोई त्रासदी, दुख केवल “मैं” के भ्रम से उत्पन्न होता है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि शरीर और मस्तिष्क अपने आप में पूर्ण हैं, अहंकार ही उनकी स्वाभाविक कार्यप्रणाली को विकृत कर देता है। साथ ही वे बताते हैं कि मुक्ति का अर्थ कर्म छोड़ना नहीं, बल्कि अहंकार को छोड़कर स्वाभाविक जीवन जीना है।
🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर:
https://open.spotify.com/show/3f0KFwe...
संगीत: मिलिंद दाते
~~~~~~~~~~~