M.P.09 सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल or उनके चमत्कारो एवं उनकी महानता की सम्पूर्ण जानकारी khandwa2022
Pankaj bairagi
0:00 / 0:00
M.P.09 सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल or उनके चमत्कारो एवं उनकी महानता की सम्पूर्ण जानकारी khandwa2022
6 403 просмотра · 4 года назад
Pankaj bairagi
2,37 тыс. подписчиков
6 403 просмотра · 4 года назад
संत सिंगाजी भारत में मध्य प्रदेश मध्य के निमाड़ के एक मशहूर संत थे। उन्हें पशु रक्षक देव के रूप में पूजा जाता है तो आज हम आपको इस ब्लॉग में संत सिंगाजी के जीवन परिचय व्यापक मान्यता संत सिंगाजी जलाशय परियोजना के बारे में बात करेंगे
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से कुछ ही दूरी पर गांव ग्राम खजुरी है इसी गांव के सामान्य गवली परिवार में संत सिंगाजी का जन्म हुआ था सिंगाजी महाराज एक कवि और करामाती संत थे गुरद्वारा शिक्षा ली और 40 वर्ष की आयु में उन्होंने समाधी ले ली संत सिंगाजी को 16 17 वी शताब्दी का माना जाता है समूचे मध्यप्रदेश मैं अनेकों स्थानों पर संत सिंगाजी के डेरे व समाधिया बनी हुई है जहां पर मेलों का आयोजन भी किया जाता है कवि संत सिंगाजी के आध्यात्मिक गीत आज तक गाए जाते हैं
नर्मदा जल विद्युत विकास निगम द्वारा नर्मदा नदी पर विकसित की गई परियोजना में संत सिंगाजी जलाशय भी परियोजना का भाग है 900 वर्ग मीटर में फेला हुआ है यह भारत का सबसे बड़ा व एशिया का दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है यहां पर संत सिंगाजी की पावन समाधि का निर्माण किया गया है सिंगाजी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ है।
सन 2004 में डूब क्षेत्र में आने के पहले ही प्रशासन द्वारा इस मूल मंदिर का 80 से 90 फीट ऊंचा किसी किले के आकार का परकोटा बनाकर मंदिर को सुरक्षित बना दिया गया है और समाधि तक पहुंचने के लिए लगभग 2 किलोमीटर लंबा एक सुंदर पुल नुमा रास्ता बना दिया गया है
समाधि स्थल मंदिर खरगोन से 90 किलोमीटर इंदौर से 150 और ओमकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर से 72 किलोमीटर की दूरी पर है ट्रेन रेल मार्ग से यहां पर जाने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन खंडवा जंक्शन है खंडवा जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है जिसको तय करने के लिए आपको टैक्सी है बस की सेवा लेनी पड़ती हैं।
संत सिंगाजी महाराज के माता पिता पत्नी पुत्र तथा शिष्य के पद चिन्ह के दर्शन भी आपको ना मिलेंगे
कहा जाता है कि सिंगाजी महाराज चार बेटों के पिता थे उनकी पत्नी का नाम यशोदा बाई उनके बारे में कहा जाता है कि वह बहुत ही इमानदार एवं एकांत प्रिय थे
स्थानीय लोग सिंगाजी के मंदिर में कई प्रकार की मान मन्नत उतारने के लिए भी पहुंचते हे
उनके समाधि स्थल का बहुत बड़ा मेला भी आयोजित किया जाता है जिसमें लाखों श्रद्धालुओं आते हैं इसके अलावा आज भी उनके गांव में हर साल वैशाख सुदी की नवमी को सिंगाजी महाराज का जन्म उत्सव मनाया जाता है
यह भी कहा जाता है कि देह त्यागने के 6 महीने बाद संत सिंगाजी ने अपने शिष्यों को सपने में आकर उनकी लेटाई हुए देह को बैठे हुए आश्रम के रूप में समाधि देने के आदेश दिए थे इसका पालन करते हुए उनकी समाधि से अखंड देह निकालकर उन्हें पुनः समाधि दी गई
कहा जाता है की तब से लेके आज तक संत सिंगाजी महाराज की समाधि पर अखंड दिप प्रचलित हो रहा है