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भगवान पार्श्वनाथ के सातवें एवं आठवें भव की पावन कथा | सुवर्णबाहु चक्रवर्ती चरित्र | Jain Kahani

JAIN SUTRA

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भगवान पार्श्वनाथ के सातवें एवं आठवें भव की पावन कथा | सुवर्णबाहु चक्रवर्ती चरित्र | Jain Kahani

436 просмотров · 4 дня назад
JAIN SUTRA
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जय जिनेंद्र! 🙏 इस पावन वीडियो में भगवान पार्श्वनाथ जी की आत्मा के सातवें और आठवें भव की अलौकिक एवं प्रेरणादायक गाथा प्रस्तुत की गई है। 📌 इस वीडियो के मुख्य अंश: सातवाँ भव: मुनिराज वज्रनाभ का अगाध क्षमा-भाव, समाधि-मरण और आनत देवलोक में देव के रूप में जन्म। आठवाँ भव: पूर्व महाविदेह क्षेत्र में सुवर्णबाहु चक्रवर्ती के रूप में जन्म और वैराग्य का प्रसंग। तीर्थंकर नाम-कर्म: बीस स्थानक तप की साधना से तीर्थंकर नाम-कर्म का उपार्जन। समता एवं क्षमा: सिंह रूपी कमठ के उपसर्ग को समता से सहते हुए परम समाधि-मरण। अगर कहानी आपको पसंद आए तो लोगों के साथ शेयर कीजिए, सब्सक्राइब कीजिए, लाइक कीजिए और कमेंट में जय जिनेंद्र जरूर लिखिएगा। #Jainism #ParshvanathBhagwan #JainKahani #JaiJinendra #SpiritualSt #ParshvanathBhagwan #SuvarnabahuChakravarti #JainStories #Jainism #JaiJinendra #JainKatha #JainDharma #SpiritualStory #Tirthankar