०१२६९ अरे भिक्षुक ! तेरी भिक्षुकवृत्ति छोड़ और ज्ञान पिटारा खोल के अनंत गुणों के ख़ज़ाने को भोग !
Moksharthi Pariwar
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BV78/172.1/Bol 414