सांसां दी माला मन दा सिमरन
Guruji | Krishna Naad by Sandip Agarwal
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सांसां दी माला मन दा सिमरन
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Guruji | Krishna Naad by Sandip Agarwal
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*सांसां दी माला - मन दा सिमरन | मन शांत भया | सतिनाम वाहेगुरु | Dugri Wale Guruji | Lyrics by Sandip Agarwal*
🙏 **मन शांत भया… शोर मिट गया…
सांस सांस विच सिमरण…
सतिनाम… सतिनाम… वाहेगुरु…** 🙏
यह भजन मन की उस यात्रा का संदेश है, जहाँ इंसान बीते कल की चिंता और आने वाले कल के डर से बाहर निकलकर *इसी सांस, इसी पल और गुरु के नाम* में टिकना सीखता है।
हमारा शरीर हर पल वर्तमान में है, लेकिन मन बार-बार पुरानी यादों और भविष्य की चिंताओं में भटकता रहता है। यही भटकाव बेचैनी का कारण बनता है। इस भजन का संदेश है — *अपनी सांस को गुरु के नाम से जोड़ो और मन के शोर को धीरे-धीरे शांत होने दो।*
🌹 *सांसां दी इस माला नूं, मन के नाल परो लै तू।*
🌹 *मन दा शोर मिटावण लई, नाम सिमरण विच खो लै तू।*
गुरु साहिब के पावन संदेश *“सास सास सिमरहु गोबिंद”* की भावना से प्रेरित यह रचना हमें याद दिलाती है कि हर सांस नई है, हर पल गुरु की बख्शी हुई दात है।
जब आंखें बंद करके भीतर देखा जाता है, तो वही निरंकार हर सांस में महसूस होता है।
**सांस जो आई, सांस जो गई,
इहो जीवन दा सार है।
डरना छड्ड, वाहेगुरु जप,
ओ अंग-संग तेरा यार है।**
🎵 इस रचना में *Rabab, Dilruba, Harmonium, soft Tabla, Dholak और Sangat chanting* के माध्यम से एक शांत, ध्यानमय और आध्यात्मिक वातावरण बनाने का प्रयास किया गया है।
🙏 इस भजन को कृपया *अंत तक सुनें**, कुछ पल आंखें बंद करके सांस और वाहेगुरु नाम से जुड़ें और यदि यह भजन आपके मन को शांति दे तो इसे **गुरुजी महाराज की संगत, मित्रों और परिवार* के साथ अवश्य Share करें।
**सतिनाम वाहेगुरु 🙏
जय गुरुजी 🌹
शुकराना गुरुजी ❤️**
*Lyrics by: Sandip Agarwal*
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